
महासमुंद : प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित महासमुंद जिले के निराश्रित, विधवा और बुजुर्ग पेंशनभोगियों को पिछले 4 महीने से पेंशन नहीं मिल पाया है, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा हैं। वृद्धजन, विधवा, दिव्यांग, सुखद सहारा योजना और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े हजारों हितग्राही इस समस्या से सीधे तौर पर प्रभावित हैं। पेंशन की यह राशि इन जरूरतमंद वर्गों के लिए जीवनयापन का मुख्य सहारा होती है, ऐसे में लंबे समय से भुगतान न होने से उन्हें गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उक्त वक्तव्य जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सृष्टि अमर चंद्राकर ने विज्ञप्ति में व्यक्त करते हुए तत्काल निराश्रितों को पेंशन प्रदान करने की मांग की है।
सृष्टि ने बताया कि राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, सुखद सहारा योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और मुख्यमंत्री पेंशन योजना के हजारों हितग्राही पेंशन से वंचित हैं। ये सभी पिछले चार महीनों से अपनी पेंशन का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समस्या का मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा राज्य को अपना अंश समय पर जारी नहीं किया जाना है, जिससे राज्य सरकार को योजनाओं के क्रियान्वयन में कठिनाई आ रही है। उन्होंने कहा कि पेंशन न मिलने से बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों की दैनिक जरूरतें, दवाइयों का खर्च और भोजन तक प्रभावित हो रहा है। इससे पेंशनरों में गहरा आक्रोश और मानसिक तनाव देखने को मिल रहा है।
सृष्टि ने आरोप लगाया कि महतारी वंदन के नाम पर भाजपा की प्रदेश सरकार छग के 70 लाख महिलाओं को लाभान्वित करने की बात कहती है। जबकि, सच्चाई इसके विपरीत है। इन 70 लाख में आधे तो निराश्रित, विधवा पेंशन धारी महिलाआएं, बुजुर्ग महिलाएं, िवकलांग महिलाएं शामिलए हैं। इन्हें 500 रू. निराश्रित पेंशन मिलता है। जिसके कारण महतारी वंदन की 1000 रूपए में से 500 रू. काटकर केवल 500 रु. ही प्रदान किया जाता है। जबकि, पेंशन की 500 रु. राशि मिलाकर महतारी वंदन के 1000 रु. के साथ इन हितग्राहियों काे 1500 रु. मिला चाहिए। उन्होंने भाजपा की ‘गारंटी’ पर सवाल बताते हुए कहा कि सरकार के वादों के बावजूद जरूरतमंदों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। भाजपा की कथनी आैर करनी में जमीन-आसमान का फर्क साफ दिख रहा है।



