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छत्तीसगढ़ में महिलाओं के लिए नई संभावनाएँ खोल रही है कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

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राधेश्याम सोनवानी ,गरियाबंद :– छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि और वन आधारित आजीविका है। राज्य की बड़ी आबादी खेती, पशुपालन और लघु वनोपज संग्रहण पर निर्भर है। विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएँ कृषि कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकें कृषि क्षेत्र में तेजी से प्रवेश कर रही हैं, जो महिलाओं के लिए नई संभावनाएँ और अवसर पैदा कर रही हैं।

छत्तीसगढ़ में लगभग 70 प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और राज्य की बड़ी संख्या खेती तथा वनोपज आधारित गतिविधियों से जुड़ी हुई है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार राज्य में कृषि श्रम का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं द्वारा किया जाता है। महिलाएँ धान की खेती, सब्जी उत्पादन, पशुपालन, बीज संरक्षण, खाद निर्माण और खेत प्रबंधन जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।

राज्य की एक और प्रमुख विशेषता इसकी समृद्ध वन संपदा और लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था है। छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएँ महुआ, इमली, हर्रा, बहेरा, तेंदूपत्ता, लाख और अन्य लघु वनोपज के संग्रहण एवं प्रसंस्करण से जुड़ी हुई हैं। ये गतिविधियाँ आदिवासी परिवारों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती हैं।

हालाँकि महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन उन्हें कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भूमि स्वामित्व, संस्थागत ऋण, कृषि विस्तार सेवाओं और डिजिटल तकनीकों तक महिलाओं की पहुँच अपेक्षाकृत कम है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी भी महिलाओं के लिए नई तकनीकों के उपयोग में बाधा बनती है।

ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कृषि तकनीकें इन चुनौतियों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आज उपग्रह चित्रों, मौसम डेटा और मशीन लर्निंग मॉडल के माध्यम से किसानों को फसल की स्थिति, कीट-रोग प्रबंधन, मिट्टी की उर्वरता और सिंचाई संबंधी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा रही है। मोबाइल आधारित कृषि सलाह प्लेटफॉर्म स्थानीय भाषाओं में किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुँचा रहे हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को भी लाभ मिल रहा है।

छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहाँ छोटे और सीमांत किसानों की संख्या अधिक है, AI आधारित सलाहकारी सेवाएँ किसानों को समय पर निर्णय लेने में मदद कर सकती हैं। इससे फसल हानि कम हो सकती है, उत्पादन बढ़ सकता है और किसानों की आय में सुधार हो सकता है। महिलाओं के लिए यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि इससे श्रम कम होता है और कार्य दक्षता बढ़ती है।

पशुपालन क्षेत्र में भी AI आधारित तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएँ डेयरी और पशुपालन गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी, रोगों की शुरुआती पहचान और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए AI आधारित पशु स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

हालाँकि डिजिटल कृषि के विकास में यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि महिला किसानों की भागीदारी और जरूरतें तकनीकी विकास का हिस्सा बनें। वर्तमान में कई AI मॉडल मुख्य रूप से गेहूँ और चावल जैसी प्रमुख फसलों के डेटा पर आधारित हैं, जबकि महिलाएँ अक्सर विविध खेती जैसे दालें, मोटे अनाज, सब्जियाँ और लघु पशुपालन से जुड़ी होती हैं। इसलिए इन क्षेत्रों से जुड़े डेटा को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म में शामिल करना आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) और किसान उत्पादक संगठन (FPO) डिजिटल कृषि को जमीनी स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ये संगठन महिलाओं को डिजिटल प्रशिक्षण देने, कृषि डेटा एकत्र करने और नई तकनीकों को अपनाने में सहयोग कर सकते हैं।

कृषि आज भी भारत की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 15–18 प्रतिशत योगदान देता है और करोड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। यदि AI आधारित तकनीकों के माध्यम से कृषि उत्पादकता में थोड़ी भी वृद्धि होती है तो इससे ग्रामीण आय में महत्वपूर्ण सुधार संभव है।

जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती अनिश्चितताओं—जैसे सूखा, बाढ़ और अत्यधिक वर्षा—के बीच स्मार्ट कृषि तकनीकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। AI आधारित मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली किसानों को जोखिम कम करने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद कर सकती है।

यदि छत्तीसगढ़ में डिजिटल कृषि और AI तकनीकों को समावेशी दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाए, तो यह न केवल कृषि उत्पादन बढ़ा सकती हैं बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ग्रामीण विकास को भी नई दिशा दे सकती हैं। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ AI आधारित कृषि नवाचार राज्य की कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ, उत्पादक और समावेशी बना सकते हैं।

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