सनातन धर्म में एकादशी तिथि बहुत विशेष और महत्वपूर्ण मानी जाती है. ये तिथि जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित की गई है. इस दिन भगवान विष्णु का व्रत और विधि-विधान से पूजन किया जाता है. हर माह में दो एकदशी व्रत पड़ते हैं. पहला माह के कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में. चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जाता है.पापमोचन एकादशी का व्रत इस साल कल रखा जाने वाला है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जाने अनजाने में किए सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कल पापमोचनी एकादशी की पूजा किस शुभ मुहूर्त में की जाएगी? साथ ही जानते हैं व्रत के पारण का समय.
पापमोचनी एकदशी की तिथि:- इस साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत आज सुबह 08 बजकर 10 मिनट पर हो चुकी है. जबकि, एकादशी तिथि का समापन कल 15 मार्च 2026 को सुबह 09 बजकर 16 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए पापमोचनी एकादशी का व्रत कल रखा जाएगा.
पापमोचिनी एकादशी की पूजा विधि:- एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पीले रंग के स्वच्छ कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान व्रत का संकल्प लें. फिर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं. भगवान को जल, अक्षत, पीले वस्त्र, चंदन, पीले फूल, फल और मिठाई चढ़ाएं. विष्णु मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें. पापमोचनी एकादशी व्रत की कथा सुनें या पढ़ें. अंत में विष्णु जी और मां लक्ष्मी की आरती करें.
पापमोचनी एकादशी व्रत का पारण:- पापमोचनी एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 16 मार्च को किया जाएगा. 16 मार्च को सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर द्वादशी तिथि का समापन होगा. ऐसे में सुबह 06 बजकर 30 मिनट से सुबह 08 बजकर 54 मिनट के बीच व्रत का पारण किया जा सकता है.
पापमोचिनी एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त
1. सूर्योदय- सुबह 06 बजकर 47 मिनट तक रहेगा.
2. ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 11 मिनट से 05 बजकर 59 मिनट तक रहेगा.
3. अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से 01 बजकर 12 मिनट तक रहेगा.
4. गोधूलि मुहूर्त- शाम में 06 बजकर 46 से 07 बजकर 10 मिनट तक रहेगा.
5. सायाह्न सन्ध्या- शाम में 06 बजकर 48 मिनट से 08 बजे तक रहेगा.



