राधेश्याम सोनवानी गरियाबंद :- पूर्ववर्ती सरकार द्वारा गरियाबंद जिले में स्थापित किए गये रीपा सेंटर (महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क) आज बदहाली का शिकार हैं। करीब 15 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किए गए इन औद्योगिक पार्कों की देखरेख और क्रियान्वयन पूरी तरह शिथिल हो चुकी है। इन सेंटरों में दर्जनभर महिला स्व-सहायता समूहों ने राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत अतिरिक्त ऋण लेकर विभिन्न पैकेजिंग और निर्माण कार्य की शुरुआत की थी, लेकिन अब इन्हें किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिल रहा है।
सरकार बदलते ही लोगों को रोजगार देने वाली करोड़ों की रीपा योजना बंद हो गई है। मैनपुर के रीपा सेंटर में मशीनें बंद पड़ जाने से पैकेजिंग और सिलाई जैसे काम ठप्प हो गए। फिर भी आय के लिए समूह ने महुआ खरीदी का काम किया, लेकिन देख रेख के अभाव में ढाई लाख का महुआ चोरी हो गया। चोरी के इस घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने रीपा पर ध्यान देने की मांग उठाई। रीपा सेंटर को दोबारा शुरू करने या उपकरणों की उपयोगिता को लेकर जिला प्रशासन के अफसर भी गंभीर नहीं है। सरकार भी ध्यान नहीं दे रही।
समूह की महिलाओं को बड़ा नुकसान हुआ
फिंगेश्वर जनपद पंचायत के पूर्व अध्यक्ष पुष्पा जगन्नाथ साहू ने कहा कि जिस तरह से रीपा का रख रखाव किया जाना था, वह नहीं हुआ। समूह की महिलाएं आज कहीं न कहीं दरदर भटक रही हैं, उनको बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। रीपा सेंटरों की बिजली कट गई हो गई है। जिला प्रशासन भी ध्यान नहीं दे रहा। इन सबका जिम्मेदार कौन है। इस नुकसान की भरपाई होनी चाहिए।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ
गरियाबंद जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने कहा कि महात्मा गांधी के स्वावलंबी और आत्मनिर्भर गांवों के सपने को साकार करने में रूरल इंडस्ट्रियल पार्क की खास भूमिका रही। इस योजना के जरिये से गांवों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में मजबूती से कदम उठाया गया, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे बंद करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है।
दोबारा शुरू होना चाहिए रीपा सेंटर
गरियाबंद जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सन्नी मेमन ने कहा कि पूर्व की भूूपेश बूघेल सरकार ने हर व्यक्ति को केंद्र में रखकर योजना संचालित कर रही थी। इससे जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आया। ग्रामीण क्षेत्रों में रीपा सेंटर से ग्रामीण आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे थे, लेकिन सरकार ने दुर्भावना से रीपा सेंटर को बंद कर दिया। यह ठीक नहीं है। रीपा सेंटरों को दोबारा शुरू करके ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को रोजगार से जोड़ना चाहिए।
बदहाली के लिए सरकार और प्रशासन जिम्मेदार
जिला पंचायत गरियाबंद सदस्य संजय नेताम ने कहा कि रीपा रोजगार के लिए बहुत अच्छी व्यवस्ता थी, निश्चित तौर पर महिलाओं को आर्थिक रूप उसे मजबूत करने के लिए सरकार ने बहुत अच्छी शुरूआत की थी। पूर्वर्ती सरकार ने मैनपुर, देवभोग समेत पांच ब्लॉक में रीपा सेंटर के नाम से बनाया गया था, लेकिन आज बहुत ज्यादा दुर्दशा देखने को मिल रही है। इसके लिए सरकार और जिला प्रशासन जिम्मेदार हैं।



