Home देश-विदेश हॉर्मुज संकट गहराया, खाड़ी देशों का अमेरिका पर दबाव

हॉर्मुज संकट गहराया, खाड़ी देशों का अमेरिका पर दबाव

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ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ा यह भीषण युद्ध आज अपने 18वें दिन (शुरुआत: 28 फरवरी 2026) में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष की शुरुआत अमेरिकी और इजरायली सेना के संयुक्त “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” (Operation Epic Fury) के साथ हुई, जिसमें पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित कई शीर्ष अधिकारी मारे गए।

जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों (दुबई, कतर, बहरीन) में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और हवाई यातायात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।

युद्ध के मौजूदा हालात बेहद तनावपूर्ण हैं क्योंकि ईरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को बंद कर दिया है, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। अब तक इस जंग में 6,000 से अधिक ईरानी सैन्य कर्मी और सैकड़ों नागरिक मारे जा चुके हैं, जबकि लेबनान में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच एक नया मोर्चा खुल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की है, लेकिन कई यूरोपीय देश अभी भी इस सीधे सैन्य टकराव में कूदने से कतरा रहे हैं।

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