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विश्व कविता दिवस (21 मार्च) पर विशेष:-साहित्य के क्षेत्र में मनेद्रगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाया गिरीश पंकज ने

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सुरेश मिनोचा मनेन्द्रगढ : छत्तीसगढ़ राज्य का मनेंद्रगढ़ जिला एम सी बी , साहित्य के मंच पर ऐसा प्रथम इकलौता जिला है जिसकी माटी में पले, बढ़े , साहित्यकार गिरीश पंकज ने मनेद्रगढ़ का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया है। देश के 100 बड़े साहित्यकारों की सूची में शामिल,गिरीश पंकज , स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व कृष्ण प्रसाद उपाध्याय के ज्येष्ठ पुत्र हैं । वे समूचे छत्तीसगढ़ राज्य के ऐसे पहले साहित्यकार हैं जिनकी साहित्यिक कृतियों पर 20 खंडों में रचनावली का प्रकाशन ज्ञान मुद्रा पब्लिकेशन भोपाल के द्वारा हुआ है। पत्रकारिता में गोल्ड मेडलिस्ट, एवं विक्रमशिला विद्यापीठ द्वारा साहित्य वाचस्पति उपाधि प्राप्त,” गिरीश पंकज ,” भारतीय एवं विश्व साहित्य के अनुवाद और अनुसंधान की पत्रिका -“सद्भावना दर्पण के संपादक हैं। साहित्य के विभिन्न विधाओं में 120 से अधिक पुस्तको को लिखने का अभूतपूर्व रिकॉर्ड कायम करने वाले, मनेद्रगढ़ के मूल निवासी वर्तमान में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर मे साहित्य सृजन कर रहे हैं।

अभी तक इनके 12 उपन्यास 35 व्यंग संग्रह पांच कथा संग्रह ,तीन लघु कथा संग्रह ,नव साक्षरों के लिए 16 पुस्तकें बच्चों की 8 कृतियां साथ ही गजल संग्रह, दो गीत संग्रह कविताओं के दो संग्रह के साथ साहित्य के विभिन्न विधाओं में शताधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। भारत के नामचीन साहित्यकारों की सूची में शामिल गिरीश पंकज को हिंदी व्यंग्य लेखन में अतुलनीय योगदान के लिए हिंदी भवन नई दिल्ली में एक लाख रुपए का -“व्यंग्य श्री सम्मान-” उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ के द्वारा 2 लाख रुपए का -“साहित्य भूषण सम्मान “उपन्यास मिठलबरा की आत्मकथाके लिए -“रत्न भारतीय सम्मान “(भोपाल), लाफ्टर क्लब इंटरनेशनल मुंबई द्वारा स्वर्ण पदक सम्मान, लीला रानी स्मृति सम्मान (पंजाब) , अट्टहास युवा सम्मान (लखनऊ) लाल शुक्ल व्यंग्य सम्मान ( लखनऊ )गो रत्न ,विदूषक सम्मान (जमशेदपुर) एवं समग्र व्यंग लेखन के लिए रामदास तिवारी सृजन सम्मान (रांची) सहित अनेक बड़े साहित्यिक सम्मान मिल चुके हैं।
ज्ञान मुद्रा पब्लिकेशन भोपाल से प्रकाशित गिरीश पंकज रचनावली के संपादक वरुण माहेश्वरी ने गिरीश पंकज के साहित्य का समग्र मूल्यांकन कर 20 खंडों में रचनावली प्रकाशित की है जो छत्तीसगढ़ के साहित्यिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी साहित्यकार कीइतने वृहद पैमाने पर रचनावली प्रकाशित हुई हो।

रचनावालियों का इतिहास देखें तो इसके पूर्व अनेक पुरोधा रचनाकारों की रचनावली प्रकाशित हो चुकी है जैसे पंडित विद्या निवास मिश्र रचनावली ,प्रेमचंद, दिनकर, यशपाल हजारी प्रसाद द्विवेदी, हरिवंश राय बच्चन ,सर्वेश्वर दयाल सक्सेना वृंदावन लाल वर्मा, निराला रचनावली मुक्तिबोध रचनावली ,परसाई रचनावली ,प्रमोद वर्मा रचनावली जय शंकर प्रसाद ग्रंथावली दुष्यंत रचनावली आदि,पर छत्तीसगढ़ के गिरीश पंकज ऐसे प्रथम साहित्यकार हैं जिन पर 20 खंडों में रचनावली का प्रकाशन किया गया है। प्रत्येक रचनावली में 400 पेज हैं और कल 8000 पृष्ठ हैं। लगभग 45 वर्षों से साहित्य पत्रकारिता के दुनिया में सक्रिय छत्तीसगढ़ के लेखक गिरीश पंकज,के नाम से अब साहित्य के क्षेत्र में मनेद्रगढ़ की अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुकी है।

हिंदी साहित्य में बहुत कम ऐसे लेखक हुए हैं जिन्होंने अनेक विधाओं में समान रूप से कलम चलाने की कोशिश की है अक्सर कोई कहानीकार के रूप में या कवि के रूप में अथवा भयंकर के रूप में जीवन भर सृजनरत रहता है लेकिन मनैद्रगढ़ के गिरीश पंकज ने साहित्य के सभी विद्या में सिद्ध हस्त कलम चलाई है। अपने जीवन के शुरुआत सक्रिय पत्रकारिता से करने वाले पंकज साहित्य के दुनिया में आज एक विशिष्ट पहचान बनाने में सफल हुए हैं।

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