चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है, जो शांति, साहस और शक्ति की देवी हैं। ऐसे में आज यानी 21 मार्च को श्रद्धापूर्वक मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी।
देवी के आशीर्वाद से साधक को बौद्धिक क्षमता और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और सभी पापों से भी मुक्ति मिलती है। चलिए पढ़ते हैं देवी चंद्रघंटा की पूजा विधि और मंत्र, ताकि आप निर्विघ्न रूप से देवी की पूजा कर सकें और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े विशेषकर लाल रंग के कपड़े पहनें।
पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां चंद्रघंटा की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें।
माता को अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप, और उनके प्रिय फूल चमेली या कनेर अर्पित करें।
माता को दूध से बनी मिठाइय, खीर या शहद का भोग अर्पित करें।
अंत में परिवार सहित मां चंद्रघंटा की आरती करें और प्रसाद बांटें।
इस दिन फलाहार में चौलाई के साग का सेवन करें।
उपाय – ऋण से मुक्ति पाने के लिए मां चंद्रघंटा की के दौरान उन्हें गुड़हल के 108 फूलों से बनी माला अर्पित करनी चाहिए।
कैसा है मां चंद्रघंटा का स्वरूप
मां चंद्रघंटा का रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसलिए देवी को ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है। माता का वर्ण स्वर्ण (सुनहरा) के समान चमकीला है। माता सिंह पर सवार हैं और उन्होंने अपनी दस भुजाओं में त्रिशूल, गदा, तलवार, बाण, कमंडलु, माला और अन्य अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए हैं।
मां चंद्रघंटा के मंत्र 1. मूल मंत्र –
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
2. बीज मंत्र –
ऐं श्रीं शक्तयै नम:
3. स्तुति मंत्र –
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
4. ध्यान मंत्र –
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता॥



