नई दिल्ली : युद्ध के तनाव के बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से मित्र देशों के जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए एक सेफ कॉरिडोर की शुरुआत की है। यह गलियारा ईरान के क्षेत्रीय जल से होकर गुजरता है।
ईरान के लारक द्वीप के निकट स्थित इस मार्ग से केवल चुनिंदा जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई है। ईरानी अधिकारियों से पूर्व स्वीकृति प्राप्त जहाज ही इस गलियारे का उपयोग कर सकते हैं।
इसी कॉरिडोर से भारतीय जहाजों ने पार किया था होर्मुज स्ट्रेटसमुद्री समाचार एजेंसी लायड्स लिस्ट के अनुसार, कम से कम नौ जहाज पहले ही इस गलियारे का उपयोग कर चुके हैं। इनमे से काम से कम एक टैंकर ऑपरेटर ने सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए लगभग 20 लाख डॉलर का भुगतान किया है। अधिकतर मामलों में, राजनयिक समन्वय के माध्यम से स्वीकृति प्राप्त हुई है।
भारतीय ध्वज वाले तीन गैस टैंकर, शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी, इस मार्ग से सफलतापूर्वक जलडमरूमध्य को पार करके भारत पहुंचे हैं। शिपिंग डाटा से पता चलता है कि इन जहाजों ने ओमान के जलक्षेत्र से होकर गुजरने वाले सामान्य छोटे मार्ग से परहेज किया और इसके बजाय निगरानी में ईरानी क्षेत्रीय जलक्षेत्र से होकर गुजरे।
जलडमरूमध्य पर ईरान का अधिक नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास तनाव को बढ़ा सकता है। कई वैश्विक शिपिंग कंपनियों, विशेषकर पश्चिमी देशों से जुड़ी कंपनियों के लिए जोखिम अभी भी बहुत अधिक है। हालांकि, ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों के लिए यह विकल्प मददगार साबित हो सकता है।
इस प्रणाली का प्रबंधन ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर द्वारा किया जा रहा है। मंजूरी चाहने वाले जहाजों के लिए एक पंजीकरण तंत्र विकसित किया जा रहा है। आने वाले दिनों में एक अधिक औपचारिक अनुमोदन प्रणाली की शुरुआत की जा सकती है। शिपिंग आपरेटरों को मध्यस्थों के माध्यम से जहाज के स्वामित्व, माल और गंतव्य सहित सभी जानकारी पहले से साझा करनी होती है।



