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आज है गणगौर का व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व….

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हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर की पूजा और व्रत किया जाता है. आज तड़के 02 बजकर 31 मिनट पर तृतिया तिथि प्रारंभ हुई है. ये तिथि रात में 11 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी. इसलिए आज गणगौर का व्रत और पूजा है. गणगौर दो शब्दों गण और गौर से मिलकर बना है. इसमें गण शिव जी को और गौर माता पार्वती को कहा जाता है. गणगौर व्रत इन्हीं दोनों को समर्पित है.ये व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि गणगौर व्रत और पूजा करने से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है. कुंवारी कन्याएं भी गणगौर का व्रत मनचाहा व्रत प्राप्त करने के लिए रखती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आज गणगौर की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? साथ ही जानते हैं पूजा विधि और महत्व.

गणगौर पूजा विधि:- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजाघर साफ करके लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं. मिट्टी या लकड़ी से बनी ईसर यानी भगवान शिव और गौरी यानी देवी पार्वती की मूर्तियां रखें. एक कलश में गंगाजल भरें और उसके ऊपर गेहूं के ज्वार रखें. माता रानी को मेहंदी, कुमकुम, चूड़ियां, मंगलसूत्र और नए वस्त्र अर्पित करें. षोडशोपचार पूजा करें, जिसमें जल, अक्षत , फूल, धूप, दीपक, नैवेद्य और फल जैसी वस्तुएं अर्पित करें. अंत में, आरती करें, प्रसाद वितरित करें और अपना व्रत संपन्न करें.

गणगौर व्रत का महत्व:-धार्मिक मान्यता है कि गणगौर व्रत और पूजा करने से सुहाग की आयु लंबी होती है. गणगौर पर महिलाएं सुखी वैवाहिक जीन की कामना करती हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, देवी पार्वती ने शंकर जी को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए गणगौर का व्रत किया था. गणगौर त्योहार होली के बाद शुरू होता है. यह 18 दिनों तक चलता है और तृतीया तिथि को समाप्त होता है.

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