मनेंद्रगढ़ : एमसीबी जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई सामने आई है, जहां एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने नगर पालिका कार्यालय में अचानक दबिश देकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) और एकाउंटेंट को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस पूरी कार्रवाई से नगर पालिका महकमे में हड़कंप मच गया है और पूरे इलाके में इसकी चर्चा तेज हो गई है।बताया जा रहा है कि एसीबी की यह कार्रवाई पूरी तरह से योजनाबद्ध थी। टीम में डीएसपी स्तर के अधिकारी सहित पांच सदस्य मौजूद थे, जिन्होंने पहले से जाल बिछाकर आरोपियों को पकड़ने की रणनीति बनाई थी। कार्रवाई के तुरंत बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर अंबिकापुर ले जाया गया, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इस पूरे मामले में पीड़ित ठेकेदार चंद्रमणी वर्मा ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। ठेकेदार के मुताबिक, उन्होंने नगर पालिका के दो वार्डों में सीसी रोड का निर्माण कार्य पूरा किया था। इसके अलावा करीब दो महीने पहले 19 लाख 65 हजार रुपए की लागत से रिटर्निंग वॉल का निर्माण भी कराया था। लेकिन काम पूरा होने के बावजूद उनका फाइनल बिल पास नहीं किया जा रहा था और उन्हें लगातार टालमटोल किया जा रहा था।
ठेकेदार ने आरोप लगाया कि बिल पास करने के बदले उनसे 53 हजार रुपए कमीशन की मांग की गई थी। मजबूरी में वह पहले ही 20 हजार रुपए दे चुका था, लेकिन इसके बाद भी अधिकारियों द्वारा उसे लगातार परेशान किया जाता रहा। कर्ज लेकर काम करने वाले ठेकेदार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी, जिससे वह मानसिक रूप से भी परेशान हो गया।आखिरकार तंग आकर ठेकेदार ने एसीबी में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद एसीबी की टीम ने मामले की जांच कर जाल बिछाया। योजना के तहत ठेकेदार को बाकी बचे 33 हजार रुपए देने के लिए कहा गया। जब ठेकेदार रकम लेकर नगर पालिका कार्यालय पहुंचा, तो सीएमओ ने खुद पैसा लेने से इनकार करते हुए उसे एकाउंटेंट को देने को कहा।
जैसे ही ठेकेदार ने एकाउंटेंट को 33 हजार रुपए सौंपे, पहले से मौके पर मौजूद एसीबी की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया। इस दौरान पूरे घटनाक्रम की निगरानी की जा रही थी और जैसे ही रिश्वत की राशि का लेन-देन हुआ, टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई के बाद नगर पालिका कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कर्मचारियों में दहशत फैल गई। वहीं आम लोगों में इस कार्रवाई को लेकर संतोष और राहत की भावना देखी जा रही है, क्योंकि लंबे समय से नगर पालिका में भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही थीं।
फिलहाल एसीबी की टीम दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस पूरे भ्रष्टाचार के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या पहले भी इसी तरह से ठेकेदारों से अवैध वसूली की जाती रही है।
इस बड़ी कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां सख्त हैं और शिकायत मिलने पर किसी भी स्तर के अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।



