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मन की बात में PM मोदी ने देशवासियों से की एकजुट रहने की अपील, क्रिकेट से लेकर युवाओं तक जानें क्या-क्या बोले?

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पीएम मोदी आज ‘मन की बात’ के 132वें एपिसोड के जरिए लोगों से रूबरू हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मार्च का महीना वैश्विक स्तर पर बहुत ही हलचल भरा रहा है। हमें याद है कि पूरा विश्व भूतकाल में कोविड के कारण एक लंबे समय तक अनेक समस्याओं से गुजरा था। हमें अपेक्षा थी कि इससे निकलने के बाद दुनिया नए सिरे से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगी, लेकिन दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार युद्ध की परिस्थितियां बनती चली गई। वर्तमान में हमारे पड़ोस में एक महीने से भीषण युद्ध चल रहा है। हमारे लाखों परिवारों के सगे, संबंधी इन देशों में रहते हैं, खाड़ी देशों में काम करते हैं। मैं खाड़ी देशों का बहुत आभारी हूं कि वे वहां रह रहे एक करोड़ से ज्यादा भारतीयों को हर प्रकार की मदद दे रहे हैं।”

‘युद्ध के बीच अफवाहों में न आएं देशवासी’

पीएम मोदी ने संघर्ष के बीच देशवासियों से अपील करते हुए कहा, “जिस क्षेत्र में अभी युद्ध चल रहा है, वह हमारी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा केंद्र है। इसकी वजह से दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल को लेकर संकट की स्थिति बनती जा रही है। हमारे वैश्विक संबंध, अलग-अलग देशों से मिल रहा सहयोग और पिछले 1 दशक में देश का जो सामर्थ्य बना है उसकी वजह से भारत इन परिस्थितियों का डटकर मुकाबला कर रहा है। मैं आज मन की बात के माध्यम से देशवासियों से आग्रह करूंगा कि हमें एकजुट होकर इस चुनौती से बाहर निकलना है। जो लोग इस विषय पर भी राजनीति कर रहे हैं उन्हें राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह 140 करोड़ देशवासियों के हित से जुड़ा विषय है। ऐसे में जो लोग अफवाह फैला रहे हैं, वे देश का नुकसान कर रहे हैं। मैं देशवासियों से अपील करूंगा कि वे जागरूक रहें, अफवाहों में न आएं और सरकार की तरफ से निरंतर जो जानकारी दी जा रही है उसी पर विश्वास करें।”

‘पांडुलिपियों को करें संरक्षित’

पीएम मोदी ने पांडुलिपियों के संरक्षण का जिक्र करते हुए कहा, “ज्ञान भारतम सर्वे। इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद manuscripts यानी पांडुलिपियों के बारे में जानकारी जमा करना है। इस सर्वे से जुड़ने का एक माध्यम ज्ञान भारतम ऐप है। आपके पास अगर कोई manuscript है, पांडुलिपि है, या उसके बारे में जानकारी है तो उसकी फोटो ज्ञान भारतम ऐप पर जरूर साझा करें। अरूणाचल प्रदेश के नामसाई के चाओ नंतिसिन्ध लोकांग जी ने ताई लिपि में पांडुलिपियां साझा की हैं। अमृतसर के भाई अमित सिंह राणा ने गुरुमुखी लिपि में पांडुलिपि शेयर की हैं। यह हमारी महान सिख परंपरा और पंजाबी भाषा से जुड़ी लिपि है।”

‘भारत दुनिया का सबसे युवा देश’

युवाओं का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, देश के युवा की ताकत जब राष्ट्र निर्माण में जुड़ती है तो बहुत बड़ी मदद मिलती है। राष्ट्र निर्माण के इस दायित्व को निभाने में मेरा युवा भारत यानि ‘MY भारत’ संगठन बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। ये संगठन युवाओं को अलग-अलग पॉजिटिव गतिविधियों से जोड़ रहा है। इनसे पता चलता है कि युवा साथी देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए कितना तत्पर हैं। युवाओं ने विभिन्न मुद्दों पर निबंध लिखे हैं और सुझाव दिए हैं। मैं उन सभी युवाओं की सराहना करता हूं जो अपने विचार साझा कर रहे हैं।”

टी20 विश्व कप और रणजी ट्रॉफी का जिक्र 

खेलों के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “देशभर के खेल प्रेमियों के लिए यह महीना जोश और उत्साह से भर देने वाला रहा है। जब भारत ने T20 विश्व कप में ऐतिहासिक जीत दर्ज की तो देश में हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। अपनी टीम की इस शानदार सफलता पर हम सभी को बहुत गर्व है। पिछले महीने के आखिर में कर्नाटक के हुबली में एक बहुत ही रोचक मुकाबला देखने को मिला। इस मुकाबले को जीतकर जम्मू-कश्मीर की क्रिकेट टीम ने रणजी ट्रॉफी को अपने नाम कर लिया। सबसे खुशी की बात है कि करीब 7 दशकों के लंबे इंतजार के बाद इस टीम ने अपना पहला रणजी खिताब हासिल किया। टीम के कप्तान पारस डोगरा ने अद्भुत कौशल दिखाया। कश्मीर के युवा गेंदबाज आकिब नबी की भी देश में चर्चा हो रही है, जिन्होंने रण जी में 60 विकेट लिए। जम्मू-कश्मीर के लोग इस जीत से बहुत उत्साहित हैं। वहां के युवाओं में खेलों के प्रति उत्साह और अधिक बढ़ गया है। आने वाले समय में यह स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने में सहायक होगा। फुटबॉल जैसे खेल भी यहां के युवाओं में काफी लोकप्रिय है।”

‘अन्य खेलों में युवाओं की रुचि’

पीएम मोदी ने आगे कहा, “मैं अक्सर कहता हूं जो खेलेगा वह खिलेगा। हमारे देश के युवा उन खेलों को भी अपना रहे हैं जो पहले इतने लोकप्रिय नहीं थे। उत्तर प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ी गुलवीर सिंह ने कुछ ही हफ्ते पहले न्यूयॉर्क सिटी हाफ मैराथन में तीसरा स्थान हासिल कर इतिहास रच डाला। वे एक घंटे से कम समय में हाफ मैराथन पूरा करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। मुझे अस्मिता Athletics League की जानकारी भी मिली है। इसमें 8 मार्च को महिला दिवस के अवसर पर कई sporting events का शानदार आयोजन किया गया। League में करीब 2 लाख बेटियों ने भागीदारी की। ये देखकर अच्छा लगता है कि भारत की नारीशक्ति देश में हो रहे इस sporting transformation में अहम भूमिका निभा रही है। भारत की नारी शक्ति भी इसमें अहम भूमिका निभा रही है।”

‘फिटनेश पर भी ध्यान दें देशवाशी’

फिटनेस के बारे में पीएम मोदी ने कहा, “मेरा हमेशा से आग्रह रहा है कि आप अपनी फिटनेस पर ध्यान दें। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में अब 100 दिनों से भी कम समय बचा है, पूरी दुनिया में योग के प्रति आकर्षण भी लगातार बढ़ रहा है। अफ्रीका के जिबूती में अल्मिस जी अपने अरविंद योग सेंटर के जरिए योग को बढ़ावा दे रहे हैं। वे यहां की कई और जगहों पर भी लोगों को योग सिखाते हैं। मशहूर इंफ्लुएंसर युवराज दुआ ने मुझसे आग्रह किया था मैं उनके पिताजी से कहूं कि वह शुगर इनटेक कम करें और मुझे खुशी है कि उनके पिता मेरे आग्रह पर अमल किया। हमें खाने में भी 10 प्रतिशत तेल की कटौती करनी है। इससे आप मोटापे और तमाम बिमारियों से भी दूर रहेंगे। इन छोटे छोटे प्रयासों से आप माटापे और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों से दूर रहेंगे।”

शिक्षा के क्षेत्र में भी किए जा रहे प्रयास 

शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों के बारे में पीएम मोदी ने कहा, “मुझे बेंगलुरु में शिक्षा से जुड़े एक अद्वितीय प्रयास के बारे में जानकारी मिली है। यहां एक टीम प्रयोग इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन रिसर्च चला रही है। इस टीम का अनुसंधान परियोजनाओं पर विशेष ध्यान है। यह टीम स्कूल स्तर पर विज्ञान की शिक्षा को लोकप्रिय बनाने में जुटी है। नागा जनजातियां में मोरूंग लर्निंग की एक पारंपरिक व्यवस्था थी। इसमें बुजुर्ग लोग अपने अनुभवों से युवाओं को पारंपरिक ज्ञान, इतिहास और जीवन कौशल के बारे में बताते थे। समय के साथ यह सिस्टम अब मोरूंग शिक्षा की अवधारणा में बदल गया है। इसके माध्यम से बच्चों में गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रुचि पैदा की जाती है। इसमें समुदाय के बुजुर्ग उन्हें कहानियां, लोकगीत और पारंपरिक खेलों के साथ जीवन कौशल सिखाते हैं।”

जल संकट से बचने के लिए जल संचय जरूरी

पीएम मोदी ने गर्मियों से पहले जल संकट की बात करते हुए कहा, “देश के कई हिस्सों में गर्मियों का शुरुआत हो गई है। यह समय जल संचय का है। जल संकट से निपटने के लिए गांव-गांव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास होने लगे हैं। कहीं पुराने तालाबों की सफाई हो रही है, कहीं बरसात के जल को सहेजने के लिए प्रयास किया जा रहा हैं। अमृत सरोवर अभियान के तहत भी देशभर में करीब 70 हजार अमृत सरोवर बनाए गए हैं। जन भागीदारी से जल संरक्षण का काम भी व्यापक हो जाता है।”

‘आसान बनाया जा रहा मछुवारों का जीवन’

मछुवारों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मझुआरे सिर्फ समुद्र के योद्धा नहीं हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की नींव भी हैं। मेहनतकश मछुआरों का जीवन अब आसान बनाया जा रहा है। ओडिशा के संबलपुर की सुजाता भूयान जी एक गृहिणी थीं, लेकिन वो कुछ नया करके अपने परिवार की और मदद करना चाहती थीं। इसलिए कुछ वर्ष पहले उन्होंने हीराकुंड reservoir में Fish Farming शुरू की। केवल दो-तीन वर्ष के भीतर उन्होंने अपने प्रयास को एक फलते-फूलते बिजनेस में बदल दिया। समंदर में उनकी गतिविधियों को मौसम का रुख प्रभावित करता है, इसलिए टेक्नॉलोजी के जरिए भी उनकी मदद की जा रही है।”

‘छोटे प्रयास बनते हैं बड़े बदलाव की नींव’

पीएम मोदी ने कहा, “जब समाज खुद आगे आता है तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव बन जाते हैं। हाल ही में यूपी के वाराणसी में एक प्रेरक प्रयास देखने को मिला। वहां एक ही घंटे में 2 लाख 51 हजार से अधिक पौधे लगाए गए और नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। इस प्रयास की सबसे खात बात ये रही कि इसमें हजारों लोग एक साथ जुड़े। छात्र, जवान, स्वयंसेवी संगठन, अलग अलग संस्थाएं, सबने मिलकर इस काम को संभव बनाया। इसी तरह नागालैंड के चिजामी गांव से भी एक बहुत प्रेरक प्रयास सामने आया है। जन भागीदारी का यही रूप एक पेड़ मां के नाम अभियान में भी देखने को मिला। कई बार हमारे प्रयास ही सबसे मजबूत रास्ता दिखा देते हैं।”

कोने-कोने में दिखने लगा ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ का प्रभाव

सोलर एनर्जी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “आज आप देश के किसी भी छोटे कोने में जाएंगे तो आपको एक बदलाव जरूर दिखेगा। ये बदलाव है कि आपको देश के हर कोने में कहीं न कहीं एक सोलर पैनल दिख ही जाएगा। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से कई परिवारों को लाभ मिल रहा है।” आखिर में पीएम मोदी ने कहा कि मन की बात के लिए हर महीने देश के अलग-अलग हिस्सों से संदेश मिलते हैं। इससे ये भी पता चलता है कि दूर-दराज के इलाकों में बैठे लोग इसे कितने चाव से सुनते हैं। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि संवाद का एक माध्यम बन गया है।

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