हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम काफी जरूरी है, लेकिन 30 की उम्र के बाद महिलाओं में कैल्शियम कम होने लगता है। हालांकि, महिलाएं वक्त रहते इस ओर ध्यान नहीं देतीं, जिसके कारण यह समस्या धीरे-धीरे ऑस्टियोपोरोसिस का रूप ले लेती है।
इसलिए समय पर कैल्शियम की कमी की पहचान करना जरूरी है। आइए जानें कैल्शियम की कमी होने पर महिलाओं में कैसे संकेत दिखाई देते हैं और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए।
कैल्शियम की कमी के 5 संकेत मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द- पैरों, हाथों और बाहों में बार-बार खिंचाव या ऐंठन होना कैल्शियम की कमी का शुरुआती लक्षण है। चलते या हिलते-डुलते समय जांघों और बाहों में दर्द महसूस हो सकता है।
ज्यादा थकान और सुस्ती- पूरी नींद लेने के बाद भी अगर आप दिनभर थका हुआ और सुस्त महसूस करती हैं, तो यह हड्डियों के कमजोर होने का संकेत हो सकता है। इससे ब्रेन फॉग और चक्कर आने जैसी समस्या भी हो सकती है।
कमजोर नाखून और रूखी त्वचा- कैल्शियम की कमी से नाखून पतले होकर टूटने लगते हैं। त्वचा में ज्यादा रूखापन और खुजली भी देखी जा सकती है।
दांतों की समस्या- हमारे शरीर का ज्यादातर कैल्शियम दांतों और हड्डियों में जमा होता है। कमी होने पर दांत कमजोर होने लगते हैं, मसूड़ों में दर्द होता है और दांतों में सड़न जल्दी लगने लगती है।
हड्डियों का कमजोर होना- हल्की सी चोट लगने पर फ्रैक्चर हो जाना या पीठ और गर्दन में लगातार दर्द रहना ऑस्टियोपोरोसिस की शुरुआत हो सकती है, जो कैल्शियम की भारी कमी का कारण है।
कैल्शियम की कमी से कैसे बचें?
- डेयरी प्रोडक्ट्स खाएं- दूध, दही, पनीर और छाछ कैल्शियम के सबसे बेहतरीन सोर्स हैं। रोजाना कम से कम दो गिलास दूध या एक कटोरी दही जरूर लें।
- हरी पत्तेदार सब्जियां- पालक, मेथी, ब्रोकोली और बीन्स को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। इनमें कैल्शियम के साथ-साथ फाइबर भी भरपूर होता है।
- सीड्स और नट्स- तिल, चिया सीड्स, बादाम और अखरोट कैल्शियम के खजाने हैं। एक चम्मच सफेद तिल में काफी मात्रा में कैल्शियम होता है।
- विटामिन-डी है जरूरी- बिना विटामिन-डी के हमारा शरीर कैल्शियम को अब्जॉर्ब नहीं कर पाता। इसलिए रोजाना 15-20 मिनट धूप में जरूर बैठें।
- कैफीन और नमक पर कंट्रोल- ज्यादा चाय, कॉफी और नमक शरीर से कैल्शियम को बाहर निकाल देता है। इनका सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करें।



