ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब ग्रहों के राजा सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. अभी सूर्य देव मीन राशि में हैं, लेकिन जल्द ही इसी महीने वो अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे, तब मेष संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. मेष संक्रांति के दिन सूर्य पूजन और स्नान-दान का विशेष महत्व है. इस दिन भक्त बड़ी संख्या में गंगा स्नान और दान-पुण्य करते हैं.धार्मिक मान्यता है कि मेष संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा करने से उत्तम स्वास्थ्य और धन-ऐश्वर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मेष संक्रांति कब मनाई जाने वाली है. इस दिन पुण्य और महापुण्य काल का समय क्या रहेगा? साथ ही जानते हैं इस दिन स्नान-दान का मुहूर्त और पूजा विधि.
मेष संक्रांति कब है:- इस साल 14 अप्रैल को सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे. इसलिए इस साल मेष संक्रांति 14 अप्रैल को मनाई जाएगी.
मेष संक्रांति पुण्य और महापुण्य काल:- इस बार मेष संक्रांति पर पुण्यकाल का समय सुबह 06 बजकर 29 मिनट शुरू होगा. ये दोपहर 01 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा दिन महा पुण्यकाल सुबह 07 बजकर 33 मिनट शुरू होगा. ये 11 बजकर 45 मिनट तक रहेगा.
मेष संक्रांति स्नान-दान शुभ मुहूर्त:- संक्रांति के दिन स्नान-दान के लिए पुण्यकाल और महापुण्य काल का समय सबसे शुभ माना जाता है. मेष संक्रांंति के दिन पुण्यकाल और महापुण्य काल के समय ही स्नान-दान करें. इससे विशेष लाभ प्राप्त होता है.
मेष संक्रांति पूजा विधि:- मेष संक्रांति के दिन गंगा स्नान करें. अगर ये संभव न हो तो घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें. इसके बाद साफ कपड़े पहनकर उगते सूर्य को लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और लाल चंदन डालकर अर्घ्य दें. इस दौरान “ॐ सूर्याय नमः” का जाप करें. फिर घर के पूजा स्थल पर या मंदिर में बैठकर आदित्य हृदय स्तोत्र पढ़ें. मान्यता है कि ऐसा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं.



