Home आस्था भगवान शिव की जटाओं में क्यों समाईं मां गंगा? जानें इस रहस्य...

भगवान शिव की जटाओं में क्यों समाईं मां गंगा? जानें इस रहस्य की पूरी कहानी

0

हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर गंगा सप्तमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां गंगा पहली बार स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। इसलिए इस दिन मां गंगा की पूजा-अर्चना और स्नान और दान करने का विशेष महत्व है।

ऐसा माना जाता है कि गंगा सप्तमी के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव की जटाओं में क्यों समाईं मां गंगा। अगर नहीं पता, तो आइए जानते हैं इस शिव पुराण के खास प्रसंग के बारे में।

इस तरह शिव जी की जटाओं में समाईं गंगा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में भागीरथ ने अपने पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति के लिए मां गंगा की तपस्या की। उनसे पृथ्वी पर अवतरित होने के लिए प्रार्थना की। मां गंगा भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न हुईं और पृथ्वी लोक पर अवतरित के लिए पर तैयार हो गईं, लेकिन एक समस्या सामने आई कि गंगा की धारा का प्रवाह अधिक तेज था, जिसकी वजह से पूरे जगत का विनाश हो जाता।

इस समस्या का समाधान पाने के लिए ब्रह्मा जी के पास भागीरथ पहुचें, जिसका समाधान ब्रह्मदेव ने महादेव को बताया। इसके बाद उन्होंने भगवान शिव को तपस्या के द्वारा प्रसन्न किया। जगत का विनाश के लिए महादेव ने अपनी जटाओं को खोल दिया और मां गंगा स्वर्ग से शिव जी की जटा में समाईं। शिव जी की जटाओं में आने के बाद गंगा का वेग कम हो गया। फिर मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं।

गंगा सप्तमी 2026 डेट और टाइम
 वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार गंगा सप्तमी का पर्व 23 अप्रैल को मनाया जाएगा।
वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत- 22 अप्रैल को रात 10 बजकर 50 मिनट पर
वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि का समापन- 23 अप्रैल को रात 08 बजकर 50 मिनट पर होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here