नई दिल्ली: पाकिस्तान इन दिनों एक अजीब स्थिति में है। एक ओर वह पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की कोशिशों का केंद्र बना हुआ है, तो दूसरी ओर देश के अंदर गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। इस हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का एक और दौर पाकिस्तान में होने की संभावना है।
हालांकि, आम लोगों को रोजाना घंटों बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने वादा किया था कि कटौती 2-3 घंटे से ज्यादा नहीं होगी, लेकिन पिछले हफ्ते कई जगहों पर इससे ज्यादा समय तक बिजली नहीं रही। देश में पीक समय में करीब 4,500 मेगावाट बिजली की कमी दर्ज की गई।
अधिकारियों का कहना है कि इस संकट का एक कारण खाड़ी देशों से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कमी है। बिजली उत्पादन के लिए पाकिस्तान को कम से कम चार टैंकर गैस की जरूरत है, ताकि गैस आधारित पावर प्लांट चल सकें।
बताया गया कि सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण ने बांधों से पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा, क्योंकि राज्यों की प्राथमिकता सिंचाई रही। ऐसे में बिजली संकट पर ध्यान नहीं दिया गया। यह स्थिति पाकिस्तान में प्रशासनिक अव्यवस्था की ओर इशारा करती है, जहां अलग-अलग संस्थाओं के बीच तालमेल की कमी अक्सर समस्याएं बढ़ा देती है।
वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कतर और सऊदी अरब का दौरा किया। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से उनकी मुलाकात भी चर्चा में रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि अगर समझौता हुआ, तो वह खुद इस्लामाबाद आ सकते हैं। हालांकि अभी यह तय नहीं है।



