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नेपाल में सियासी संकट: 26 दिन में ही घिरी बालेन शाह की सरकार, दो मंत्रियों का इस्तीफा

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नई दिल्ली: नेपाल में बड़े बदलाव और सुधारों के वादे के साथ सत्ता में आई बालेन शाह सरकार शुरुआती दिनों में ही मुश्किलों में घिरती जा रही है। अभी नए सरकार के गठन के एक महीने भी नहीं हुए और दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है।

महज 26 दिनों के भीतर भ्रष्टाचार और नैतिकता के आधार पर दो कैबिनेट मंत्रियों के इस्तीफे ने बालेन शाह सरकार की स्थिरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या अपने वादे पूरे कर पाएगी बालेन सरकार?दरअसल, एक तरफ जहां नेपाल की बालेन सरकार के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल मची है, वहीं दूसरी ओर भारत-नेपाल सीमा पर नए सीमा शुल्क नियमों और आसमान छूती महंगाई ने आम जनता के गुस्से को भड़का दिया है। ऐसे में अब इस बात पर संदेह उठने लगे हैं कि क्या नया नेतृत्व अपने वादे पूरे कर रहा है।

रैपर से राजनेता बने 35 वर्षीय बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही उनकी सरकार अस्थिरता से जूझ रही है। महज 26 दिनों के भीतर दो मंत्रियों ने इस्तीफे ने शाह की सुधारवादी छवि और उनकी पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) द्वारा किए गए वादों पर संदेह पैदा कर दिया है, जिसने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और पारदर्शी शासन लाने का वादा करते हुए भारी बहुमत से सत्ता हासिल की थी।
26 दिनों में दो मंत्रियों का इस्तीफानेपाल के गृह मंत्री, सुदन गुरुंग, अपने निवेश और व्यक्तिगत लेन-देन को लेकर उठे सवालों का हवाला देते हुए इस्तीफा देने वाले दूसरे मंत्री बन गए हैं। एक सार्वजनिक बयान में, गुरुंग ने कहा कि वह जवाबदेही के हित में पद छोड़ रहे हैं, इस बात पर जोर देते हुए कि “नैतिकता पद से बड़ी है” और सार्वजनिक जीवन स्वच्छ रहना चाहिए।

इससे पहले, श्रम मंत्री दीपक कुमार साह को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में अपनी पत्नी के लिए पद सुरक्षित करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने के आरोपों के बाद पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने शपथ लेने के महज 13 दिन बाद ही अपनी ही पार्टी के दबाव के चलते इस्तीफा दे दिया था।

फिलहाल, बालेन शाह ने गृह मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया है जब तक कि उनकी जगह किसी और को नियुक्त नहीं कर दिया जाता। राजनीतिक उथल-पुथल के अलावा, भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में जनता का असंतोष भी उबल रहा है।

भारत-नेपाल सीमा पर क्यों बढ़ा तनाव?एक नए नियम के तहत भारत से 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य का सामान लाने वाले किसी भी व्यक्ति को सीमा शुल्क देना अनिवार्य है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले कई लोग, जो अपनी दैनिक जरूरतों के लिए भारत से आने वाले सस्ते सामान पर निर्भर हैं, इस कदम से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इस नीति ने लोगों में स्पष्ट आक्रोश पैदा कर दिया है, और प्रवर्तन कार्रवाइयों के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहे हैं।

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