नई दिल्ली: नेपाल में बड़े बदलाव और सुधारों के वादे के साथ सत्ता में आई बालेन शाह सरकार शुरुआती दिनों में ही मुश्किलों में घिरती जा रही है। अभी नए सरकार के गठन के एक महीने भी नहीं हुए और दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है।
महज 26 दिनों के भीतर भ्रष्टाचार और नैतिकता के आधार पर दो कैबिनेट मंत्रियों के इस्तीफे ने बालेन शाह सरकार की स्थिरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या अपने वादे पूरे कर पाएगी बालेन सरकार?दरअसल, एक तरफ जहां नेपाल की बालेन सरकार के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल मची है, वहीं दूसरी ओर भारत-नेपाल सीमा पर नए सीमा शुल्क नियमों और आसमान छूती महंगाई ने आम जनता के गुस्से को भड़का दिया है। ऐसे में अब इस बात पर संदेह उठने लगे हैं कि क्या नया नेतृत्व अपने वादे पूरे कर रहा है।
इससे पहले, श्रम मंत्री दीपक कुमार साह को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में अपनी पत्नी के लिए पद सुरक्षित करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने के आरोपों के बाद पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने शपथ लेने के महज 13 दिन बाद ही अपनी ही पार्टी के दबाव के चलते इस्तीफा दे दिया था।
फिलहाल, बालेन शाह ने गृह मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया है जब तक कि उनकी जगह किसी और को नियुक्त नहीं कर दिया जाता। राजनीतिक उथल-पुथल के अलावा, भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में जनता का असंतोष भी उबल रहा है।



