Home छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर कानूनी लड़ाई खत्म: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर कानूनी लड़ाई खत्म: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

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बिलासपुर : छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने विधेयक को संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन बताया था। याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने याचिका की ग्राह्यता पर आपत्ति जताते हुए, खारिज करने का अनुरोध किया था।

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता अमरजीत पटेल ने अधिवक्ता ज्ञानेंद्र कुमार महिलांग के जरिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवी जन बेंच में हुई। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा था, विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता, अंतःकरण और चयन के मौलिक अधिकार पर कठोर प्रतिबंध लगाता है। यह विधेयक मनमाना, अस्पष्ट, अत्यधिक व्यापक, भेदभावपूर्ण, असंगत तथा भारत के संविधान के अनुच्छेद 14,19 (1) (a), 21,25, और 29 का उल्लंघन करने वाला है। लिहाजा विधेयक को असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त करने की मांग की थी।

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने याचिका की ग्राह्यता को चुनौती देते हुए कहा, याचिका इस समय विधि विचारण की पात्रता नहीं रखती, यह ग्राह्य होने योग्य ही नहीं है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने यह कहा, राज्य सरकार ने अभी तक प्रवर्तन की तिथि अधिसूचित नहीं की है, इसलिए अधिनियम को चुनौती देना समय से पहले होगा। इस आधार पर डिवीजन बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया है।

जानिए धर्म स्वातंत्रय अधिनियम कब बनेगा कानून

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम को 19 मार्च 2026 को विधानसभा ने पारित किया है। 10 अप्रैल 2026 को अधिसूचना प्रकाशित की गई, अधिसूचना में लिखा है, विधानसभा का निम्नलिखित अधिनियम जिस पर 6 अप्रैल 2026 को राज्यपाल की अनुमति प्राप्त हो चुकी है। राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद राज्य सरकार राजपत्र में प्रकाशित करेगी। राजपत्र में प्रकाशन होते ही विधेयक कानून का रूप ले लेगा।

बता दें, छत्तीसगढ़ में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ के पारित होने के बाद मसीही समाज के प्रतिनिधि क्रिस्टोफर पॉल ने भी विधेयक के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें कानून के कई कड़े प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए विधेयक को रद्द करने की मांग की है। राज्य सरकार के इस विधेयक में जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी से धर्मांतरण पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। नए कानून के अनुसार अवैध धर्मांतरण पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है। आर्थिक प्रलोभन, दबाव या छल से धर्म बदलवाने को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। साथ ही संगठित या बड़े स्तर पर धर्मांतरण कराने पर और सख्त दंड देने का उल्लेख है। राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून धर्मांतरण पर रोक नहीं, बल्कि गैर-कानूनी तरीकों पर नियंत्रण के लिए लाया गया है।

अधिनियम में शामिल कड़े प्रावधानों पर जताया एतराज और दी चुनौती

याचिकाकर्ता क्रिस्टोफर पॉल ने अपनी याचिका में कहा है, यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। इस कानून में अवैध धर्मांतरण पर आजीवन कारावास जैसी सजा देना असंवैधानिक है।

याचिका के अनुसार कानून की परिभाषाएं अस्पष्ट हैं, जिससे मनमानी कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है। यह व्यक्तिगत निजता Right to Privacy और आस्था के अधिकार में हस्तक्षेप करता है।

अधिनियम के बहाने सरकार कर सकती है टारगेट, उत्पीड़न की आशंका

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है, इस अधिनियम को राज्य सरकार टारगेट कर हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकती है। मसीही समाज की तरफ से आरोप लगाया गया है, इस कानून का इस्तेमाल उत्पीड़न के लिए हो सकता है। इसके तहत सामाजिक संगठनों में आशंका है, कठोर सजा और अस्पष्ट शब्दावली से दुरुपयोग हो सकता है।

छत्तीसगढ़ में लगभग 900 चर्च

छत्तीसगढ़ में तकरीबन 727 चर्च हैं। हालांकि ग्रामीण अंचलों में छोटे-छोटे चर्चों को मिलाकर इनकी संख्या 900 के पार है। इनमें सबसे पहला चर्च विश्रामपुर में है, जो सिटी ऑफ रेस्ट के नाम से जाना जाता है, जिसे 1868 में बनाया गया था।

वहीं जशपुर के कुनकुरी में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोमन कैथोलिक कैथेड्रल चर्च है, जिसे 1979 में स्थापित किया गया था। यहां प्रार्थना के लिए कई राज्यों से मसीह समाज के लोग आते हैं। साथ ही अलग-अलग समय धर्म प्रचार के लिए कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

जानिए क्या है छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026

इस कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, झूठी जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना प्रतिबंधित होगा।

कोई व्यक्ति यदि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले से सूचना देनी होगी।

प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा।

विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा, यह भी विधेयक में स्पष्ट किया गया है।

अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है।

यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए जुर्माना हो सकती है।

सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे तथा मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी।

2021 से अब तक जिलों में हिंदू संगठन-मसीही समाज के बीच टकराव

रायपुर 14,महासमुंद 12,धमतरी 1 दुर्ग 10,बालोद 6 सरगुजा 1,जशपुर 6,बस्तर 1,जांजगीर-चांपा 10,कोरबा 20,बलरामपुर14,बिलासपुर 12,कोरिया1,कबीरधाम 1,गौरेला-पेंड्रा-मरवाही 2 सूरजपुर 1,दंतेवाड़ा 1

जानिए छत्तीसगढ़ में किस धर्म के कितने प्रतिशत लोग करते हैं निवास?

93.25% हिंदू

0.27% सिख

2.02% मुस्लिम

0.27% बौद्ध

1.92% ईसाई1.94% लोग अन्य 11:23%

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