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कोरिया की प्रत्येक पंचायत कार्यालय भवनों की दीवारों पर अंकित होगा गांवों का जलस्तर

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सुरेश मिनोचा कोरिया :  कोरिया जिले में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा जारी मोर गांव मोर पानी महाभियान के तहत एक नई पहल की जाएगी। अब कोरिया जिले के प्रत्येक ग्राम पंचायत में आम नागरिकों को वहां का जल स्तर पता होगा। जल संरक्षण और भू-जल स्तर के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए कलेक्टर कोरिया श्रीमती चंदन त्रिपाठी के निर्देश पर सभी ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर गांवों के वाटर लेवल (जलस्तर) की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी।

अभियान का मुख्य उद्देश्य
जिला पंचायत कोरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य आम नागरिकों को उनके क्षेत्र के भू-जल स्तर की वास्तविक स्थिति से अवगत कराना है। जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार ग्राम स्तर पर जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। कई ग्राम पंचायतों में यह कार्य आरंभ कर दिया गया है।

तकनीकी डेटा का लेखन
’जल-दूत’ ऐप का उपयोगः कोरिया जिले के सभी ग्राम पंचायतों में अभी गांवों के जलस्तर से जुड़ी जानकारियां ’जल-दूत’ मोबाइल ऐप के माध्यम से संकलित कर पोर्टल पर अपलोड की जा रही हैं। इनका निर्धारित प्रपत्र अनुसार ग्राम पंचायत के कार्यालय भवनों की दीवारों पर लेखन कार्य कर जल स्तर का प्रदर्शन सुनिश्चित किया जाएगा।

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस
आगामी 24 अप्रैल को मनाए जाने वाले ’राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ में इसे सभी भवनों में लिखाए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। आने वाले समय में ग्राम पंचायत के प्रत्येक नागरिक को अपने गांव के भूजल स्तर की वास्तविक जानकारी मिल पाएगी। इससे ग्राम पंचायतों में आने वाले समय में जल प्रबंधन का बेहतर कार्य हो सकेगा। जिला पंचायत द्वारा जारी पत्र के अनुसार सभी जगह यह जानकारी स्पश्ट और व्यवस्थित रूप से प्रदर्षित करने के निर्देष दिए गए हैं।

जागरूकता में होगी वृद्धि
बीते कुछ वर्षों के डेटा के साथ जब वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होगी तब स्थानीय ग्रामीण अपनी आंखों के सामने घटते या बढ़ते जलस्तर को देखेंगे, इससे उनमें जल संचयन, वर्षा जल संग्रहण और भू-जल पुनर्भरण जैसे विषयों के प्रति सकारात्मक सोच पैदा होगी। यह पहल भविष्य में जल संकट की संभावनाओं को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। इस कार्य के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग और केंद्रीय भूजल बोर्ड से आवश्यक डेटा और समन्वय प्राप्त किया जा रहा है।

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