सुरेश मिनोचा एमसीबी: खेती में नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की दिशा में क्षेत्र के किसान तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के ग्राम लालपुर निवासी किसान प्रयाग सिंह ने इस वर्ष अपनी खेती में पहली बार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया है। आसपास के किसानों की बेहतर पैदावार और सकारात्मक अनुभवों ने उन्हें इस आधुनिक उर्वरक तकनीक पर भरोसा करने के लिए प्रेरित किया है।प्रयाग सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने गांव और आसपास के कई किसानों की फसलों में नैनो उर्वरकों के उपयोग के बाद उल्लेखनीय सुधार देखा है। बेहतर वृद्धि, स्वस्थ फसल और संतोषजनक उत्पादन ने उनके मन में भी विश्वास पैदा किया कि नैनो उर्वरक खेती के लिए एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन क्षमता में वृद्धि की संभावना रहती है। यही कारण है कि उन्होंने इस सीजन में अपनी खेती में इनका उपयोग करने का फैसला किया है।
प्रयाग सिंह के अनुसार नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सुविधा है। पारंपरिक उर्वरकों के भारी बोरे ढोने की तुलना में नैनो उर्वरक छोटी बोतलों में उपलब्ध होते हैं, जिन्हें ले जाना, संग्रहित करना और उपयोग करना बेहद आसान है। इससे किसानों का समय, श्रम और परिवहन लागत तीनों की बचत होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार होगा, बल्कि खेती की लागत कम करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र की सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है, जिससे खेती संबंधी कार्य सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं। प्रयाग सिंह का मानना है कि बदलते समय के साथ किसानों को भी नई तकनीकों को अपनाना चाहिए। उन्होंने अन्य किसानों से वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित खेती और आधुनिक कृषि नवाचारों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे कृषि अधिक लाभकारी, टिकाऊ और समृद्ध बन सकती है।
किसानों के बीच बढ़ रही नैनो उर्वरकों की लोकप्रियता
क्षेत्र में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के प्रति किसानों का बढ़ता विश्वास इस बात का संकेत है कि कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलाव अब जमीनी स्तर तक पहुंच रहे हैं। प्रयाग सिंह जैसे किसानों का आगे आकर नई तकनीकों को अपनाना न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।



