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सुपर अल-नीनो का खतरा: क्या छत्तीसगढ़ में इस बार नहीं होगी बारिश? जानें मौसम वैज्ञानिकों की राय

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दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों के बीच इस समय ‘सुपर अल-नीनो’ को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि साल 2026 में मई से जुलाई के बीच प्रशांत महासागर की तपिश का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। भारत के कई राज्यों में सूखे की आशंका जताई जा रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ के किसानों और आम जनता के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ताजा आंकड़ों और राज्य की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति का विश्लेषण करें तो छत्तीसगढ़ इस वैश्विक संकट से काफी हद तक सुरक्षित नजर आ रहा है।

छत्तीसगढ़ और मानसून का कनेक्शन

ज्यादातर केस में जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तो मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और बारिश की कमी के कारण अकाल जैसे हालात बन जाते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ की कहानी कुछ अलग है। राज्य के घने जंगल और पहाड़ मानसून को रोकने और बारिश कराने में ‘नेचुरल बैरियर’ का काम करती है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में जून से सितंबर के बीच औसतन 1143.3 मिमी बारिश होती है। पिछले 30 सालों के डेटा पर नजर डालें, तो पता चलता है कि अल-नीनो के चरम वर्षों में भी यहां बारिश का आंकड़ा सामान्य के आसपास ही रहा है।

अल-नीनो का इतिहास

अगर हम अल-नीनो के इतिहास में जाए, तो छत्तीसगढ़ ने कई बार अल-नीनो की भविष्यवाणियों को गलत प्रूफ किया है।

• 1997-98 की भीषण गर्मी: जब पूरी दुनिया भयंकर सूखे की चपेट में थी, तब भी छत्तीसगढ़ की जमीन प्यासी नहीं रही और यहां 1105 मिमी बारिश दर्ज की गई।

• 2003 और 2010 का दौर: इन सालों में भी अल-नीनो का साया मानसून पर भारी था, लेकिन छत्तीसगढ़ में भौगोलिक स्थिति के चलते औसत से भी अधिक बारिश दर्ज की गई थी।

हालांकि, 2000 और 2002 जैसे कुछ साल भी रहे है जिसमें प्रदेश में सामान्य से 26 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। लेकिन जब हम पूरी पैटर्न पर नजर डालते है तो छत्तीसगढ़ का ‘मॉनसून रिटेंशन’ पावर अन्य राज्यों के मुकाबले बेहतर है।

क्या है अल-नीनो ?

अल-नीनो एक ऐसी समुद्री हलचल है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी औसत से अधिक गर्म हो जाता है। यह गर्मी वायुमंडल के चक्र को बदल देती है, जिससे मानसून की दिशा और रफ्तार प्रभावित होती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए इसे अक्सर ‘अशुभ’ माना जाता है क्योंकि इसकी वजह से मानसून में देरी या सूखे की स्थिति पैदा हो जाती है।

सतर्कता जरुरी हैं

मौसम विभाग के विश्लेषण के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के लिए फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं दिख रहा है। किसानों के लिए अच्छी खबर यही है कि इस साल भी खेतों में सामान्य बारिश की पूरी संभावना है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जल संरक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हमें भविष्य के लिए अपनी नदियों और जलाशयों को सहेजने पर जोर देना चाहिए, जिससे प्रकृति का यह संतुलन हमेशा बना रहें।

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