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चरम पर अफगान-पाकिस्तान तनाव: तालिबान ने PAK पर लगाया आम नागरिकों पर हमले का आरोप, 4 की मौत; 70 घायल

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 नई दिल्ली : अफगानिस्तान ने सोमवार को पड़ोसी देश पाकिस्तान पर पूर्वी इलाके में नागरिक क्षेत्रों पर गोलाबारी करने का आरोप लगाया है। अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और करीब 70 लोग घायल हो गए।

संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन ने भी पुष्टि की है कि पूर्वी शहर असदाबाद में एक यूनिवर्सिटी पर हमला हुआ है, हालांकि उसने यूनिवर्सिटी का नाम या हमले के जिम्मेदार का जिक्र नहीं किया। अफगान अधिकारियों का कहना है कि फरवरी के अंत से पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कम से कम नौ प्रांतों में कई जगहों पर हमले किए हैं।

छात्रों सहित कई लोग घायलतालिबान सरकार के प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत के मुताबिक, सोमवार की गोलाबारी में घायल होने वालों में 30 छात्र भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सभी पीड़ित आम नागरिक हैं।

वहीं, पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया है। पाकिस्तान सरकार ने कहा कि यूनिवर्सिटी पर हमला करने का आरोप पूरी तरह झूठ है। पाकिस्तानी सेना ने इस बारे में किसी भी सवाल का जवाब देने से भी इनकार कर दिया।

दोनों देशों के बीच बढ़ता तनावपाकिस्तान ने तालिबान सरकार पर तहरीक-ए-तालिबान नामक आतंकी संगठन को शरण देने का आरोप लगाया है, जिसने पिछले वर्षों में पाकिस्तान में कई हमले किए हैं। हालांकि, तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है, लेकिन कई पड़ोसी देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन इस बात से सहमत हैं कि ऐसे समूह मौजूद हैं।

असदाबाद स्थित कुनार यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बताया कि अचानक हुए धमाकों से क्लासरूम और हॉस्टल में अफरा-तफरी मच गई। छात्र अहमद सुहैल रहमानी ने कहा कि यूनिवर्सिटी उम्मीद और भविष्य की जगह है, लेकिन अब लोग वहां से भागने की कोशिश कर रहे हैं।

वहीं छात्र साजिद इकबाल साफी ने बताया कि किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हमलों के डर से कई लोगों ने रात खेतों में बिताई और अब कोई अपने घर लौटने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है।

और गहराया मानवीय संकटफरवरी से जारी इस संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में कई सैन्य ठिकानों के साथ-साथ व्यवसाय, मस्जिदों और स्कूलों को भी निशाना बनाया है, जिससे सैकड़ों नागरिकों की मौत हुई है। 16 मार्च को काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए हमले में करीब 240 मरीजों की मौत हो गई थी, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र ने बताया।

अफगानिस्तान पहले से ही गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है। अमेरिका की मदद में कटौती और करीब 30 लाख अफगान नागरिकों की वापसी के कारण हालात और खराब हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस साल देश की करीब आधी आबादी यानी लगभग 2.2 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत पड़ेगी।

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