रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक, अगर मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे तो FY2027 में LPG पर तेल कंपनियों का घाटा (अंडर-रिकवरी) करीब 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव और सप्लाई में दिक्कतें हैं, जिससे कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं.
तेल कंपनियों पर दबाव क्यों बढ़ रहा है:- ICRA के सीनियर अधिकारी प्रशांत वशिष्ठ ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम ज्यादा नहीं बढ़ाए गए हैं. इससे तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की कमाई पर असर पड़ रहा है. अगर कच्चे तेल की कीमत 120125 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो पेट्रोल पर करीब 14 प्रति लीटर और डीजल पर 18 प्रति लीटर तक नुकसान हो सकता है.
LPG महंगी, लेकिन कंपनियों को पूरा पैसा नहीं मिल रहा:- पश्चिम एशिया से LPG सप्लाई प्रभावित होने के कारण इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ गई हैं. भारत ने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से सप्लाई बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन घरेलू LPG पर कंपनियों को अभी भी नुकसान हो रहा है.
खाद सेक्टर में भी बढ़ा दबाव:- अमोनिया और सल्फर जैसे कच्चे माल महंगे हो गए हैं, जिससे खाद बनाने की लागत बढ़ गई है. यूरिया के लिए गैस की कीमत भी $13 से बढ़कर करीब $19 प्रति mmbtu हो गई है. ICRA का अनुमान है कि FY2027 में खाद सब्सिडी 2.05 से 2.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो बजट से ज्यादा है.
कुल मिलाकर क्या संकेत:- ऊंची ऊर्जा लागत और कच्चे माल की कीमतों के चलते कई सेक्टर्स की कमाई पर दबाव बना रहेगा. रिफाइनिंग सेक्टर ठीक रह सकता है, लेकिन फ्यूल रिटेलिंग, खाद और केमिकल सेक्टर के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण दिख रहा है.



