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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण काँग्रेस की देन: सृष्टि

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अनाधिकृत व नियम विरूद्ध निंदा प्रस्ताव के विरोध में सृष्ट ने साैंपा ज्ञापन
नारी शक्ति वंदन आरक्षण बिल पर व्हाट्सएप ग्रुप में भ्रामक जानकारी प्रसारित करने का आरोप

महासमुंद: नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल लोकसभा में पास नहीं होने पर जिला पंचायत के अधिकारियों द्वारा जिला पंचायत सदस्यों के व्हाट्सएप ग्रुप में व्यक्तिगत रूप से कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों के विरूद्ध निंदा प्रस्ताव पारित कराने संबंधी एक पत्र वायरल किया गया है। जिसे पूर्णत: असंवैधानिक व नियम विरूद्ध बताते हुए जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सृष्टि अमर चंद्राकर ने निष्पक्ष जाँच कर संबंधित अिधकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार को ज्ञापन साैंपकर की है।
जिपं सदस्य श्रीमती सृष्टी ने उक्त वायरल पत्र को लेकर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि किसी भी सरकारी संस्था में संवैधानिक रूप से राजनैतिक दलों के विरूद्ध निंदा प्रस्ताव पारित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकसभा में बिल पास न होने की निंदा करते हुए विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी एवं इंडिया गठबंधन के विरुद्ध आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। जिसमें ना ही किसी का हस्ताक्षर है, आैर ना ही सील मुहर। जिला पंचायत एक संवैधानिक संस्था है, जहां चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते हैं। अतः किसी भी राजनीतिक दल अथवा गठबंधन के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव जारी करना न केवल अनुचित है बल्कि यह पूर्णतः गैर-संवैधानिक कृत्य है।

वर्तमान 15 सदस्यीय जिला पंचायत में 8 महिला सदस्य एवं स्वयं अध्यक्ष महिला हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में कांग्रेस की पूर्ववर्ती नीतियों एवं कांग्रेस सरकार की देन है। पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण अनिवार्य रूप से 24 अप्रैल 1993 को 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 के लागू होने के साथ शुरू हुआ। जिसके तहत महिलाओं के लिए कम से कम 33% (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित की गईं। यह आरक्षण अनुच्छेद 243डी के तहत आज भी पंचायतों के सभी स्तरों पर लागू है। जो कांग्रेस सरकार की देन है। 1993 में कांग्रेस की सरकार थी तथा भारत के प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव जी थे। उन्होंने 21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक देश के 9वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल में ही 1993 में 73वां संवैधानिक संशोधन (पंचायती राज) पारित किया गया था। ऐसे में किसी दल विशेष के विरुद्ध इस प्रकार का प्रस्ताव भेजना तथ्यहीन एवं भ्रामक है।

सृष्टि ने कहा कि महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक वर्ष 2023 में ही पारित होकर दिनांक 16 अप्रैल 2023 को माननीय राष्ट्रपति महोदया के हस्ताक्षर उपरांत कानून बन चुका है। अतः इसके संबंध में भ्रामक प्रचार करना उचित नहीं है। भाजपा की मोदी सरकार द्वारा लाई गई वर्तमान महिला आरक्षण बिल का दुरुपयोग भाजपा अपनी निजी लाभ के लिए करना चाहती है। यह बिल महिलाओं को अिधकार देने नहीं अपितु परिसीमन पर आधारित है। परिसीमन के मुद्दे को जोड़कर इस विषय को राजनीतिक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे छोटे राज्यों विशेषकर छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जिला पंचायत द्वारा वायरल उक्त निंदा प्रस्ताव पर न तो किसी प्रकार की आधिकारिक मुहर है और न ही हस्ताक्षर, फिर भी इसे जिला पंचायत के अधिकारियों द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से प्रसारित किया गया है, जो अत्यंत गंभीर प्रशासनिक त्रुटि है।

अत: श्रीमती चंद्राकर ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जिन अधिकारियों द्वारा इस प्रकार का अनधिकृत प्रस्ताव प्रसारित किया गया है, उनके विरुद्ध आवश्यक सख्त कार्रवाई की जाए। भविष्य में इस प्रकार की राजनीतिक एवं भ्रामक सामग्री का जिला पंचायत के माध्यम से प्रसारण पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए। इस विषय में की गई कार्रवाई से सभी सदस्यों को अवगत कराया जाए। प्रकार की घटनाएं पुनः घटित होती हैं, तो यह जिला पंचायत की गरिमा एवं संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध होगा। भविष्य में इस प्रकार की कृत्य से कांग्रेस की गरीमा व भावनाओं को ठेस पहुँचने पर उग्र आंदोलन करने हेतु बाध्य होना पड़ेगा।

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