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इटली की पीएम मेलोनी ने वायरल तस्वीरों पर तोड़ी चुप्पी, छवि खराब करने वालों को दिया कड़ा संदेश

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नई दिल्ली : इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने ऑनलाइन वायरल हो रहे अपनी एक डीपफेक फोटो का सार्वजनिक तौर पर विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह घटना दिखाती है कि, कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल लोगों को गुमराह करने और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए एक हथियार के तौर पर किया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को इटली की प्रधानमंत्री ने इस फेक तस्वीर को अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किया। इसके साथ ही उन्होंने “रॉबर्टो” नाम के एक यूजर के स्क्रीनशॉट को भी शेयर किया, जिसने इस तस्वीर को यह दावा करते हुए दोबारा शेयर किया था कि मेलोनी को शर्म आनी चाहिए। मेलोनी ने लोगों से अपील करते हुए लिखा कि, “किसी भी यूजर्स को बिना वेरिफाई किए कोई भी कंटेंट शेयर करने से बचना चाहिए।”

मेलोनी ने फेसबुक पोस्ट कर दी चेतावनीइसके साथ ही मेलोनी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में चेतावनी देते हुए लिखा, “डीपफेक एक खतरनाक हथियार हैं, क्योंकि वे किसी को भी धोखा दे सकते हैं, उनके साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और उन्हें निशाना बना सकते हैं। मैं अपना बचाव खुद कर सकती हूं, लेकिन कई अन्य लोग ऐसा नहीं कर सकते।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे यह मानना पड़ेगा कि जिसने भी ये तस्वीरें बनाई हैं। कम से कम इस मामले में उसने मुझे काफी बेहतर दिखाया है। लेकिन सच तो यह है कि आजकल सिर्फ हमला करने और झूठी बातें फैलाने के लिए किसी भी चीज का इस्तेमाल किया जा रहा है।”

हर किसी का इरादा नहीं होता सही: मेलोनीहालांकि यह तस्वीर पूरी तरह से मनगढ़ंत थी, लेकिन मेलोनी ने कहा कि इसके पीछे का इरादा बिल्कुल साफ था। झूठ के सहारे उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करना। उन्होंने कहा कि भले ही इस छेड़छाड़ में उन्हें ज्यादा आकर्षक रूप में दिखाया गया हो, लेकिन यह मुद्दा कहीं ज्यादा गंभीर है।

उन्होंने आगे लिखा, “लेकिन सच तो यह है कि आजकल सिर्फ हमला करने और झूठी बातें फैलाने के लिए किसी भी चीज का इस्तेमाल किया जा रहा है।” अभी यह साफ नहीं है कि क्या वह इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई करेंगी, हालांकि कई यूजर्स ने उन्हें अधिकारियों से इस मामले की शिकायत करने की सलाह दी है।

पहले से चल रहा है एक मुकदमाबता दें कि, दो साल पहले मेलोनी ने सार्डिनिया के एक व्यक्ति के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उस व्यक्ति पर मेलोनी के चेहरे का इस्तेमाल करके अश्लील डीपफेक तस्वीरें बनाने और उन्हें ऑनलाइन पोस्ट करने का आरोप है। यह मुकदमा अभी भी चल रहा है। AI और डीपफेक से जुड़े खतरों के खिलाफ मेलोनी की यह लड़ाई दक्षिणपंथी सरकार के एजेंडे का एक अहम हिस्सा बन गई है।

पिछले साल सितंबर में, इटली AI के इस्तेमाल को रेगुलेट करने के लिए कानून पारित करने वाला पहला यूरोपीय संघ (EU) का देश बन गया। इस कानून के तहत, AI तकनीक का इस्तेमाल करके नुकसान पहुंचाने वालों, जिसमें डीपफेक बनाने वाले भी शामिल हैं। उसके लिए सजा तक का प्रावधान किया गया है, और बच्चों की AI तक पहुंच पर भी सीमाएं तय की गई हैं।

मेलोनी की सरकार ने कहा कि यह कानून, जो यूरोपीय संघ के ऐतिहासिक ‘EU AI एक्ट’ के अनुरूप है। इस बात को आकार देने की दिशा में एक निर्णायक कदम है कि, पूरे देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास और इस्तेमाल किस तरह से किया जाएगा।

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