महासमुंद : सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में करीब 5 माह पूर्व गैस से भरे हुए 6 कैप्सूल वाहन से करीब 92 टन गैस चोरी के आरोप में पुलिस ने जिला खाद अधिकारी अजय यादव और मुख्यालय स्थित गौरव गैस एजेंसी के संचालक व भाजपा नेता पंकज चंद्राकर और रायपुर के दुकान संचालक मनीष चौधरी समेत 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले दो आरोपी फरार है जबकि एक आरोपी पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
शनिवार को एसपी प्रभात कुमार ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पत्रकारवार्ता लेकर मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 24 दिसम्बर 2025 थाना सिंघोडा में अपराध क्रमांक 96/25 धारा 305 (ई), 287, 3(5), 221, 351(2) बीएनएस,ईसी एक्ट-1955 की धारा 3,7 में जप्तशुदा 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रक क्रमांक CG 07 CX 7245, CG 07 CX 7244, CG 07 CS 1663, CG 07 CX 7472, ΚΑ 01 ΑΗ 4318, CG 12 BS 4295 में LPG गैस भरे हुए ट्रक को जब्त किया गया था। दुर्घटना की संभावना को देखते हुए, उक्त 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखवाने कलेक्टर से मांग की थी। कलेक्टर द्वारा खाद्य विभाग कैप्सुल ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखवाने हेतु निर्देशित किया गया था।
30 अप्रैल 2026 को खाद्य विभाग के निरीक्षक अविनाश दुबे, खाद्य अधिकारी हरिश सोनेश्वरी एवं मनीष यादव महासमुन्द के उपस्थिति में ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स के संतोष सिंह ठाकुर को 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को सुपुर्द किया गया। सुपुर्द ट्रकों को संतोष सिंह ठाकुर द्वारा अपने कर्मियों के माध्यम से सिंघोडा से ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स ग्राम उरला थाना अभनपुर जिला रायपुर ले गये। उक्त 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को सुरक्षार्थ रखने हेतु ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स संतोष सिंह ठाकुर पिता मूलसिंह ठाकुर उम्र 56 वर्ष साकिन ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स ग्राम उरला थाना अभनपुर जिला रायपुर छ.ग. को न्यस्त किया गया था। जांच के दौरान प्राथी एवं गवाहों का कथन लिया गया प्राथी के. सुब्रमण्यिम के 03 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रक क्रमांक CG 07 CX 7245, CG 07 CX 7244, CG 07 CS 1663 में करीब 50 टन LPG गैस कीमती लगभग 45,00,000 रूपये तथा गवाह गुणाशेखरन के 02 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रक CG 07 CX 7472, ΚΑ 01 AH 4318 में 37 टन LPG गैस कीमती 32,00,000 रूपये को ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स के सुपुर्दनामा में लेने वाले संतोष सिंह ठाकुर के द्वारा मिलीभगत कर उक्त 05 नग LPG कैप्सुल ट्रक गैस भरा हुआ के संबंध में आपराधिक न्यास भंग करना पाया गया। अतः कुल 87 टन LPG गैस कीमती करीब 77,00,000 रूपये का ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स के सुपुर्दनामा में लेने वाले संतोष सिंह ठाकुर तथा अन्य डायरेक्टर, संचालक, मैनेजर व अन्य व्यक्तियों के विरूद्ध अपराध क्रमांक 42/26 धारा 316(3), 3(5) बीएनएस के तहत जुर्म जांच में लिया गया।
कब हुई षड़यंत्र की शुरुआत
एसपी ने बताया कि खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर ने 1 करोड़ रुपए के गैस गबन की कहानी लिखी। अजय यादव ने पंकज चंद्राकर को दिया क्रियान्वयन और सही एजेंसी को ढूंढने का जिम्मेदारी दी। पंकज ने रायपुर के मनीष चौधरी का से इसके लिए विभिन्न एजेंसियों को संपर्क करने का काम दिया।
सुपुर्दगी से चार दिन पूर्व किया था मूल्यांकन
गैस की मात्रा के जानकारी के बिना पैसो के मूल्यांकन में मुश्किल हो रही थी डील, 26 मार्च को दोनों सूत्रधार खाद्य अधिकारी अजय यादव और पंकज चंद्राकर गैस की मात्रा का आंकलन करने सिंघोड़ा पहुंचे। 6 कैप्सूल में कुल 105 मीट्रिक टन का अनुमान लगाया गया। तुरंत 1 करोड़ के सपने पर लगा दी गयी मुहर। मनीष चौधरी को फ़ोन पर संपर्क कर उसी दिन संभावित एजेंसी को बुलाने के लिए बताया गया। मात्रा और पैसे के बाद मनीष ने भी देरी नहीं की| 26 मार्च को ही रात 11 बजे तीनो षड्यंत्रकारियों की एक गैस एजेंसी के मालिक के साथ मध्यरात्रि को हुई बैठक हुई पहली एजेंसी मालिक ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया। बाद मनीष को ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल से 80 लाख रुपए में डील कीएसपी ने बताया कि खाद्य अधिकारी अजय यादव थे परदे के पीछे के मुख्य खिलाडी थे। पंकज चंद्राकर गबन और डील का जिम्मेदारी दी गई थी। पंकज ने डील को महासमुंद से दूर रखने रायपुर के मनीष चौधरी को सौंप दी।
अजय को 50, पंकज को 20 और मनीष को 10 लाख मिला
गैस चोरी की इस डील में सबसे बड़ा हिस्सा 50 लाख खाद्य अधिकारी अजय यादव का था। सुपुर्दनामे के दूसरे ही दिन 31 मार्च को घर में डिलीवर हुआ| 30 लाख रकम जुगाड़ने में हो रही थी देरी। ठाकुर पर भरोसा भी कम था। ठाकुर के अकाउंट से मनीष चौधरी के अकाउंट में गिरवी के रूप में 30 लाख डलवाया गया। बाद में 1 हफ्ते के अंदर ठाकुर से मनीष चौधरी को 30 लाख रकम दिया। 10 लाख मनीष चौधरी ने अपने हिस्से में रखा और 20 लाख पंकज चंद्राकर को अपने हिस्से के मिले।
कूटरचित वजन पंचनामा की कहानी
सिर्फ गैस और पैसों के साथ ही नहीं, कागजों के साथ भी खेला गया खेल। कैप्सूल्स के सुपुर्दनामे के बाद एक हफ्ते तक एक एक करके कैप्सूल खाली करने के बाद 6 एवं 8 अप्रैल को ख़ाली कैप्सूल्स का कराया गया वजन। वजन के दौरान न तो ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक उपस्थित थे न ही कोई गवाह, वजन प्रक्रिया का एक फ़र्ज़ी पंचनामा महासमुंद में खाद्य अधिकारी के कार्यालय में बनवाया गया। उस पंचनामा में भी वही षड्यंत्रकारी मनीष चौधरी और पंकज चंद्राकर स्वतंत्र गवाह बने जो कैप्सूल्स के सुपुर्दनामे में गवाह बनाये गए थे और जिन्होंने खुद ही 92 टन एलपीजी गैस का गबन कर 80 लाख रुपये उगाही किया था।
आश्चर्य यह भी है की ये कूटरचित वजन पंचनामा का दस्तावेज 8 अप्रैल के दोपहर को ही कलेक्टोरेट के आवक जावक में पहुंच गए थे। जबकि वजन कांटा के रजिस्टर और पर्ची के अनुसार एक कैप्सूल का वजन 8 अप्रैल को ही, रात 8 बजे के बाद हुआ है।
पल्ला झाड़ने की कार्ययोजना
कोर्ट से सुपुर्दनामा आदेश और पुलिस की सक्रियता के बाद सभी षड्यंत्रकारियों के होश उड़ने शुरू हो गए। 20 अप्रैल के रात 8 से 10 बजे तक पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और संतोष ठाकुर की आरंग के ढाबे में हुई मंथन बैठक, सब कुछ पुलिस पर डालकर पल्ला झाड़ने और दबाव बनाने की बनाई थी जिसमे सबको अपने अपने बयान पर कायम रहने के दिए गए थे निर्देश।
आरोपियों से नहीं मिले डील में मिले रकम
एसपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के घरों में डील के रकम की तलाश की गई पर उन्हें कुछ खास नही मिला। आरोपी पंकज चंद्राकर से 13 हजार रुपए और एक मोबाइल, खाद अधिकारी अजय यादव से 78 हजार रूपए एक नग मोबाइल ही मिला। जबकि रायपुर निवासी मनीष चौधरी से 5,11,900 रुपए का होम अप्लायंस का सामान, 1 नग मोबाईल एवं नकद 8000 रुपए मिले। पुलिस ने बताया मामले में फरार आरोपियों की तलाश जारी है।



