नई दिल्ली : West Asia में चल रही उथल-पुथल का असर दुनिया के ज्यादातर देशों में देखने को मिला है। ईरान की ओर से प्रतिबंधित स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत के पड़ोसी देश नेपाल पर भी इसका गहरा असर पड़ा है और वहां खाद की समस्या देखने को मिल रही है।
अब नेपाल सरकार ने भारत से 80,000 टन रासायनिक खाद (उर्वरक) खरीदने का फैसला किया है। इसमें 60,000 टन यूरिया और 20,000 टन DAP शामिल है। खबर ये भी है कि नेपाल शुरू में 1.5 लाख टन खाद मांगना चाहता था, लेकिन बजट की कमी के कारण मात्रा घटा दी गई।
G2G व्यवस्था के तहत खरीद
दुनिया भर में खाद की सप्लाई प्रभावित होने के डर के बीच भारत से सरकार-से-सरकार (G2G) व्यवस्था के तहत रासायनिक खाद खरीदने की दिशा काम हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कि सरकार ने 4 मई को कैबिनेट में खाद खरीदने की योजना को मंजूरी दे दी थी। अब नेपाल ने भारत की सरकारी कंपनी राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड से कीमत की डिटेल मांग ली है।
120 दिन में सप्लाई का आश्वासन
नेपाल के कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव राम कृष्ण श्रेष्ठ ने बीते दिनों बताया कि हमें इस हफ्ते भारत से कीमतों की लिस्ट मिलने की उम्मीद है। हम कीमत के दरों की समीक्षा करने के बाद औपचारिक रूप से ऑर्डर देंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनी ने भुगतान के 120 दिनों के भीतर डिलीवरी का आश्वासन दिया है। उन्होंने ये भी कहा कि लेकिन चूंकि यह इमरजेंसी है, इसलिए हमने और कम समय में डिलीवरी (Import) की मांग की है।
किसानों पर पड़ेगा बुरा असर
आपको बता दें कि जून के महीने से धान की खेती शुरू हो जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक धान की रोपाई के मौसम में नेपाल को अकेले करीब 2.5 लाख टन खाद की जरूरत होती है। सप्लाई में कमी होने से फसल की पैदावार और किसानों की आय पर असर पड़ने की आशंका है। अधिकारियों का कहना है कि नए ग्लोबल टेंडर निकालने में कम से कम 225 दिन लग सकते हैं। इसलिए सरकार ने जून में शुरू होने वाले धान की रोपाई के मौसम से पहले भारत से तुरंत खाद की आपूर्ति मांगी है।
इसके अलावा धान को नेपाल की मुख्य फसल के रूप में देखा जाता है। नेपाल में चावल अनाज की कुल खपत का 67 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा रखता है। इसले अलावा नेपाल में प्रति व्यक्ति चावल की वार्षिक खपत औसतन 137.5 किलोग्राम बताई जा रही है।



