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अधिकमास का पहला प्रदोष व्रत कल है जाने पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व…

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सनातन धर्म में प्रदोष के व्रत का बहुत महत्व है. एक माह में दो बार प्रदोष व्रत पड़ता है. एक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को. प्रदोष का व्रत देवों के देव महादेव को समर्पित किया गया है. इस दिन प्रदोष काल के समय भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता कि प्रदोष व्रत रखने और शिव पूजन करने से जीवन में खुशहाली आती है. कारोबार अच्छा चलता है. भगवान शिव की कृपा सदा बनी रहती है. ये व्रत मोक्ष भी दिलाता है. जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उस दिन के वार के नाम से प्रदोष व्रत रखा जाता है. अधिकमास यानी मलमास में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. कल यानी 28 मई को अधिकमास का पहला प्रदोष व्रत है. कल गुरुवार का दिन है, इसलिए ये गुरु प्रदोष व्रत रहेगा. कल प्रदोष काल में भगवान शिव का शिव पूजन किया जाएगा. जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व.

प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त:- कल प्रदोष काल का समय शाम को 07 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगा. प्रदोष काल रात को 09 बजकर 15 मिनट रहेगा. यही शिव पूजन का भी शुभ मुहूर्त रहेगा. शिव भक्त कल इसी समय में पूजन करें.

प्रदोष व्रत की पूजा विधि:-  गुरु प्रदोष व्रत में ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद व्रत रखने का संकल्प लें. फिर भगवान शिव की प्रतिमा पर बेलपत्र, जल, दूध, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें. इसके बाद प्रदोष काल में फिर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. विधि विधान शिव की पूजा करें. भगवान शिव को फल और मिठाई का भोग लगाएं. इस समय गुरु प्रदोष व्रत की कथा भी सुनें. शिव जी के मंत्रों का जाप करें. अंत में भगवान शिव की आरती कर पूजा संपन्न करें.

प्रदोष व्रत का महत्व:- गुरु प्रदोष व्रत विशेष रूप से ज्ञान, धन, संतान सुख और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए बहुत लाभदायक है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना शुभ फल देती है. साथ ही इस व्रत को करने से कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है.

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