सनातन धर्म में प्रदोष के व्रत का विशेष महत्व है. ये व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है. महादेव को समर्पित इस व्रत की महिमा का वर्णन शिव पुराण में विस्तार से किया गया है. आज अधिकमास का पहला प्रदोष व्रत है. गुरुवार होने के कारण ये गुरु प्रदोष व्रत है. प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इस दिन प्रदोष काल में ही भगवान शिव का विधि-विधान से पूजन किया जाता है.धार्मिक मान्यता है कि गुरु प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर महादेव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन खुशहाल बनता है. इस दिन पूजा करने से कुंडली में मौजूद गुरु दोष से भी मुक्ति मिल जाती है. प्रदोष व्रत के पुण्य प्रभावों से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. आज गुरु प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शाम को 02 घंटे 03 मिनट का समय मिलेगा. इसी समय में विधि-विधान से शिव जी का पूजन करें.
गुरु प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त:- भगवान शिव की कृपा पाने के लिए पूजा का समय सबसे अहम माना जाता है. आज प्रदोष काल का समय शाम 07 बजकर 12 मिनट पर शुरू हो रहा है. प्रदोष काल का ये समय रात को 09 बजकर 15 मिनट तक रहेगा. यही गुरु प्रदोष व्रत पर भगवान शिव के पूजन का शुभ मुहूर्त है. आज शिव भक्त शाम को 02 घंटे 03 मिनट तक अपने आराध्य की पूजा कर सकते हैं.
अधिकमास का गुरु प्रदोष व्रत है खास:- अधिकमास हर तीसरे साल में आता है. ये माह भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है. भगवान विष्णु का एक नाम पुरुषोत्तम भी है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस माह में किए गए पूजा, जप, तप, दान आदि का पुण्य कई गुना मिलता है. ऐसे में इस माह का प्रदोष व्रत भी बड़ा विशेष माना जाता है. यह व्रत करियर में सफलता, संतान सुख और आर्थिक तंगी से मुक्ति दिलाता है.
गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि
- गुरु प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पीले या सफेद वस्त्र धारण करें.
- इसके बाद शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव की विधिवत पूजा करें.
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित करें.
- इसके बाद धूप-दीप जलाकर ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें.
- प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें.



