कोमल ग्वाला अमनपथब्यूरो चीफ जशपुर नई दिल्ली/जशपुर : वर्ष 2006 में रायपुर से प्रारंभ हुआ जनजाति सुरक्षा मंच का आंदोलन अब राष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। पूर्व केबिनेट मंत्री व जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक माननीय श्री गणेश राम भगत जी के नेतृत्व में वर्षों से धर्मांतरित लोगों को आदिवासी सूची से बाहर करने यानी डीलिस्टिंग की मांग को लेकर लगातार सैकड़ों रैलियां, धरना-प्रदर्शन और जनजागरण अभियान चलाया जा गया है।इसी कड़ी में 24 मई को जनजाति सुरक्षा मंच व जनजागृति समिति समिति के द्वारा संयुक्त रूप से दिल्ली के लालकिला मैदान में आयोजित विशाल जनजातीय सांस्कृतिक समागम में देशभर से लाखों की संख्या में जनजातीय प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता व समाज के लोग अपने पारंपरिक वेशभूषा के साथ शामिल हुए तथा ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक झलकियों के बीच डीलिस्टिंग की मांग पूरे कार्यक्रम में प्रमुख मुद्दा बनी रही राष्ट्रीय संयोजक माननीय गणेश राम भगत जी ने मंच से कहा कि आज हम अपने धर्म संस्कृति की रक्षा व हक और अधिकार के लिए पूरे देश भर से जनजाती समाज लगभग ढाई लाख लोग शामिल हुए हैं यदि जरूरत पड़ी तो पांच लाख लोग इसी लालकिला मैदान में एकत्रित होंगे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे भारत सरकार के गृह मंत्री माननीय अमित शाह जी ने जनजातीय संस्कृति और परंपरा की सराहना करते हुए मंच से राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत तथा वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र खरवार के कार्यों की काफी प्रशंसा की उन्होंने ने कहा कि मेरे राजनीतिक जीवन में पहली बार इतने संख्या में जनजाति सांस्कृतिक समागम में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और कहा कि हमारी भारतीय जनता पार्टी माननीय नरेंद्र मोदी जी की सरकार जनजातियों के विकास के लिए हमेशा खड़े हैं तथा यू सी सी कानून पर स्पष्ट किया की आदिवासीयों को यू सी सी प्रभावित नहीं करेगा भ्रमित करने वाले लोग लोगों से बचिए वहीं दूसरी ओर, धर्मांतरित ईसाई समुदाय से जुड़े संगठनों ने डीलिस्टिंग के विरोध में जशपुर में अलग रैली निकालकर अपना प्रदर्शन किया एक ही दिन डीलिस्टिंग को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों की सक्रियता राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही।
कार्यक्रम के बाद 28 मई को जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक माननीय गणेश राम भगत जी के नेतृत्व में देशभर से पहुंचे जनजातीय प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मुलाकात कर डीलिस्टिंग की मांग संबंधी ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा से होता है न की धर्म परिवर्तन से धर्मांतरित इसाई समुदाय अपने पूर्वजों के चलाए हुए परम्परा को छोड़ कर विदेशी धर्म अपना लिए हैं ओ आदिवासी का आरक्षण का हकदार नहीं है इसलिए उनका डीलिस्टिंग आवश्यक है प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि दिल्ली में आज तक इतना बड़ा जनजाति समागम कभी नहीं हुआ है अपलोगों इतिहास बना दिया।सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री जी ने गंभीरता से इनकी बात को सुने और आश्वासन भी दिए जनजाति सुरक्षा मंच ने स्पष्ट किया कि जब तक मांग पूरी नहीं हो जाता तबतक यह आंदोलन आने वाले समय में और तेज किया जाएगा अब देखना होगा कि सरकार इसमें क्या निर्णय लेती है या जनजाति सुरक्षा मंच को आगे और आंदोलन तेज करना पड़ेगा।



