बाहरी व्यक्ति को थोपने का हो रहा है खेल
अनूपपुर :भाजपा संगठन में अनुसूचित जाति मोर्चा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा, किसान मोर्चा सहित कई मोर्चों के जिला अध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है, जबकि पिछड़ा वर्ग मोर्चा, महिला मोर्चा और युवा मोर्चा के जिलाध्यक्षों की घोषणा अभी शेष है। इनमें सबसे अधिक चर्चा और विवाद भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष पद को लेकर देखने को मिल रहा है।
जब किसी पद के एक दावेदार के समर्थन में पार्टी का मीडिया सेल खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है। आशुतोष तिवारी को लेकर जिले के बाहर का निवासी होने तथा कॉलरी कर्मचारी होने जैसे सवाल लगातार उठ रहे हैं। भाजपा जिला मीडिया सह-प्रभारी श्रीराम केवट की ओर से 28 मई 2026 को एक प्रेस नोट जारी किया गया, जिसमें आशुतोष तिवारी को “उभरता हुआ राजनीतिक चेहरा” बताते हुए उनके खिलाफ चल रही “बाहरी” वाली बहस पर सवाल खड़े किए गए। चूंकि यह प्रेस नोट भाजपा जिला मीडिया सेल की ओर से जारी हुआ है, इसलिए इसे भाजपा संगठन का आधिकारिक पक्ष माना जा रहा है।
यहीं से कई सवाल खड़े होने लगे हैं। क्या किसी एक दावेदार के समर्थन में इस तरह आधिकारिक प्रेस नोट जारी होना यह संकेत नहीं देता कि जिलाध्यक्ष पद की “स्क्रिप्ट” पहले ही लिखी जा चुकी है? क्या पैनल बनाना और नाम भेजना मात्र औपचारिकता बनकर रह गया है? यह सवाल अब अन्य दावेदारों और कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।
जिला मीडिया सह-प्रभारी ने अपने प्रेस नोट में यह भी लिखा कि कुछ लोग आशुतोष तिवारी के उभरते राजनीतिक व्यक्तित्व से घबराए हुए हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह घबराहट किसे है? क्योंकि जिस प्रकार संगठन के मीडिया प्रकोष्ठ को स्वयं सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा, उससे यह बहस और गहरी हो गई है। जहां तक “बाहरी” होने के मुद्दे का सवाल है, यह बहस भावनात्मक नहीं बल्कि तथ्यात्मक आधार पर उठाई जा रही है।
मीडिया की ओर से भाजपा जिला मीडिया सह-प्रभारी और संगठन से कुछ स्पष्ट सवाल भी पूछे जा रहे हैं। यदि आशुतोष तिवारी पिछले 22 वर्षों से अनूपपुर में निवास कर रहे हैं, तो क्या उन्होंने यहां का निवास प्रमाण पत्र बनवाया है? उनके आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और सेवा अभिलेखों में कौन-सा पता दर्ज है? इस भाजपा संगठन इन सवालों का जवाब किस प्रकार देता है।



