Home छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में महिलाओं की आय का बड़ा केंद्र बनेगा ग्राम...

आने वाले वर्षों में महिलाओं की आय का बड़ा केंद्र बनेगा ग्राम टेमरी का फलोद्यान हरियाली से आय के लिए मनरेगा के ब्लाक प्लांटेशन में 1330 फलदार पौधे हो रहे तैयार

0

बैकुण्ठपुर कोरिया :जिले में हरियाली के साथ आय के साधन निर्मित करने के उद्देश्य से लगाए गए हजारों फलदार पौधे अब लहलहा उठे हैं। महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत गत वित्तीय वर्ष में बैकुण्ठपुर जनपद के दूरस्थ ग्राम पंचायत टेमरी में उद्यान विभाग की देखरेख में एक हजार तीन सौ तीस फलदार पौधों का सफल रोपण अब लगभग तैयार हो चुका है। आने वाले दो से तीन वर्षों के बाद यह फलोद्यान कोरिया जिले में फल उत्पादन की दिशा में एक अलग पहचान होगा। पूरे क्षेत्र में पर्यावरण के संरक्षण हेतु पौधों के रोपण की महती आवश्यकता को पूरा करते हुए यह फलदार पौधों का तैयार समूह आने वाले समय में रोजगार के अवसर पैदा करते हुए क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक आर्थिक मजबूती का आधार भी होगा।

फलदार पौधों का विवरण
मनरेगा योजनातर्गत ग्राम पंचायत टेमरी में उद्यान विभाग को निर्माण एजेंसी बनाकर गत वित्तीय वर्ष में ब्लाक प्लांटेशन की स्वीकृति प्रदान की गई। इस कार्य के लिए कुल 24 लाख 58 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। यह कार्य तीन वर्षों तक संधारण में रहेगा इससे फलोद्यान पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। इस फलोद्यान में उन्नत किस्म के आमों के कुल 450 पौधे रोपे गए हैं। वहीं अमरूद की उच्च गुणवत्ता के 500 फलदार पौधों के अलावा कटहल, जामुन और आवलें के पौधे भी लगाए गए हैं। सभी पौधे तैयार हो गए हैं और जिन पौधों मे बारिश के बाद खराबी थी उन्हे बदलकर नए पौधे लगाए गए हैं।

महिलाएं सम्हालेंगी उद्यान
आगामी समय में जब यह फलोद्यान पूरी तरह से तैयार हो जाएगा तो उद्यान विभाग की देखरेख में ग्राम पंचायत टेमरी की ही महिलाएं इसकी देखभाल का जिम्मा सम्हालेंगी। महिलाओं के समूहों को उद्यान के फलदार पौधे ग्राम पंचायत के माध्यम से आबंटित कर दिए जाएंगे जिससे आने वाले समय में दर्जनों महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन प्राप्त होगा।

अंतर्वर्तीय खेती से होगा दोहरा लाभ
जिला पंचायत सीईओ डाॅ आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि कलेक्टर कोरिया श्रीमती रोक्तिमा यादव के निर्देशानुसार इस फलोद्यान में आगामी दो वर्षों के बाद जब पौधे पूरी तरह से तैयार होकर फलदार हो जाएंगे तब इन पौधों के बीच अंतर्वर्तीय खेती को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है। पौधों के बीच उचित दूरी का पूरा उपयोग करते हुए महिलाओं को फूलों के साथ औषधीय महत्व की खेती जैसे अदरक आदि के खेती के साथ इस फलोद्यान को और भी ज्यादा लाभकारी बनाए जाने की कार्ययोजना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here