महासमुंद : संयुक्त राष्ट्र संगठन (UN), नॉर्वे सरकार तथा भारत स्थित रॉयल नॉर्वेजियन दूतावास द्वारा आयोजित भारत-नॉर्वे ज्ञान एवं अनुभव आदान-प्रदान यात्रा में शामिल होकर लौटीं महासमुंद लोकसभा सांसद श्रीमती रूप कुमारी चौधरी ने कहा है कि नॉर्वे की यह यात्रा केवल एक औपचारिक विदेश दौरा नहीं, बल्कि सुशासन, सामाजिक विकास, पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और मानव-केंद्रित नीति निर्माण को निकट से समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर रही। इस यात्रा ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरणीय संतुलन और संस्थागत मजबूती से निर्धारित होती है। सांसद श्रीमती चौधरी भारत के आठ सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थीं, जिसने नॉर्वे के विभिन्न सरकारी, संसदीय, शैक्षणिक, वैज्ञानिक और औद्योगिक संस्थानों का अध्ययन किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने नॉर्वे सरकार के विदेश मामलों के राज्य सचिव एंड्रियास मोट्जफेल्ट क्राविक सहित अनेक वरिष्ठ नीति निर्माताओं, सांसदों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से संवाद किया।
सांसद ने बताया कि नॉर्वे ने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच जिस संतुलन को स्थापित किया है, वह विश्व के लिए अनुकरणीय उदाहरण है। राजधानी ओस्लो में पर्यावरण एवं परिवहन उप-महापौर मैरिट क्रिस्टीन वेआ से हुई चर्चा में यह समझने का अवसर मिला कि किस प्रकार आधुनिक शहरों को हरित परिवहन, स्वच्छ ऊर्जा और नागरिक सहभागिता के माध्यम से अधिक रहने योग्य बनाया जा सकता है। यात्रा के दौरान ओस्लो विश्वविद्यालय और ओस्लो मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों से संवाद में यह अनुभव प्राप्त हुआ कि उच्च शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर सामाजिक परिवर्तन और नीति निर्माण का आधार बनाया जा सकता है। सांसद ने कहा कि अनुसंधान आधारित शिक्षा व्यवस्था किसी भी राष्ट्र की दीर्घकालिक प्रगति की आधारशिला होती है और भारत को भी शिक्षा तथा शोध में निवेश बढ़ाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।
नॉर्वे की संसद ‘स्टोर्टिंग’ के भ्रमण को यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए सांसद श्रीमती चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती केवल संविधान से नहीं, बल्कि संस्थाओं की कार्यक्षमता, संवाद की संस्कृति और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से सुनिश्चित होती है। संसद में विभिन्न समितियों और सांसदों के साथ हुए संवाद ने लोकतांत्रिक परंपराओं और सहमति आधारित शासन व्यवस्था की प्रभावशीलता को समझने का अवसर प्रदान किया। अवसर मिला कि प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक और सतत उपयोग किस प्रकार रोजगार, निर्यात और आर्थिक समृद्धि का आधार बन सकता है।
सांसद ने कहा कि भारत के समुद्री, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में भी ऐसी अनेक संभावनाएँ मौजूद हैं, जिन्हें वैश्विक बाजारों से जोड़ा जा सकता है। अंतरिक्ष एवं उपग्रह प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत Kongsberg Satellite Services (KSAT) के भ्रमण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि पर्यावरणीय निगरानी, आपदा प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा और संसाधन प्रबंधन का भी महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है। KSAT और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के बीच दीर्घकालिक सहयोग भारत–नॉर्वे तकनीकी संबंधों की मजबूत नींव को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और ऐसे अंतरराष्ट्रीय ज्ञान एवं अनुभव आदान-प्रदान कार्यक्रम विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। नॉर्वे में भारत का प्रतिनिधित्व करना न केवल व्यक्तिगत रूप से गौरव का विषय रहा, बल्कि यह छत्तीसगढ़ और महासमुंद की जनता के विश्वास और अपेक्षाओं का भी सम्मान है।
यात्रा से लौटकर सांसद ने यह संकल्प व्यक्त किया कि विश्व के श्रेष्ठ अनुभवों और नवाचारों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाते हुए जनकल्याण, सुशासन, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सतत विकास की दिशा में निरंतर कार्य किया जाएगा।



