केशकाल: जमाअत रज़ा-ए-मुस्तफा छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदेशभर में उर्स, संदल, चादर जुलूस एवं अन्य धार्मिक आयोजनों में डीजे, धुमाल, बैंड-बाजा, आतिशबाजी तथा नाच-गाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा गया था। ज्ञापन में मांग की गई थी कि सभी धार्मिक कार्यक्रम कुरआन, हदीस एवं शरीयत की शिक्षाओं के अनुरूप सादगी, अनुशासन और धार्मिक मर्यादा के साथ आयोजित किए जाएं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने प्रदेशभर के उर्स, संदल, चादर जुलूस एवं अन्य इस्लामिक धार्मिक कार्यक्रमों के लिए दिशा-निर्देश जारी करते हुए डीजे, धुमाल, बैंड-बाजा, आतिशबाजी एवं अन्य गैर-शरई गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य इबादत, धार्मिक शिक्षा और आध्यात्मिक वातावरण को बढ़ावा देना है, इसलिए कार्यक्रमों का आयोजन इस्लामी शिक्षाओं के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।
वक्फ बोर्ड ने कहा कि उर्स, जुलूस एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम कुरआन और हदीस की रोशनी में संपन्न किए जाएं तथा ऐसे आयोजनों में किसी भी प्रकार की अशोभनीय या धार्मिक मर्यादा के विपरीत गतिविधियों को स्थान न दिया जाए। बोर्ड ने सभी आयोजन समितियों से धार्मिक परंपराओं और शरीयत के अनुसार कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की है।
साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि किसी धार्मिक आयोजन में प्रतिबंधित गतिविधियां पाई जाती हैं तो संबंधित आयोजकों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। धार्मिक आयोजनों की निगरानी और दिशा-निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्था भी मजबूत की जा रही है।
ज्ञापन सौंपने वालों में जमाअत रज़ा-ए-मुस्तफा छत्तीसगढ़ के जनरल सेक्रेटरी अरमान मेमन सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए संगठन के पदाधिकारी, सदस्य एवं जिम्मेदारान उपस्थित रहे।
वक्फ बोर्ड ने पुनः स्पष्ट किया है कि प्रदेश में आयोजित होने वाले उर्स, संदल एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रमों को धार्मिक मर्यादा, सादगी और कुरआन-हदीस की शिक्षाओं के अनुरूप संपन्न कराया जाएगा तथा निर्देशों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।



