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क्या आप जानते हैं माता सती ने अपने शरीर का त्याग क्यों किया? पढ़ें बेहद भावुक प्रसंग

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 हिंदू पौराणिक कथाओं में माता सती के आत्मदाह करने का प्रसंग बेहद भावुक है। आखिर प्रजापति दक्ष के यज्ञ में जाने के बाद माता सती को क्यों इतना कठोर कदम उठाना पड़ा। दरअसल, इसके पीछे की वजह है कि माता सती प्रजापति दक्ष के द्वारा भगवान शिव के अपमान को सहन नहीं कर पाईं। इसके बाद उन्होंने यज्ञ कुंड की अग्नि में कूदकर अपने त्याग दिए। ऐसे में आइए इस लेख में आपको विस्तार से बताते हैं माता सती के आत्मदाह करने की कथा के बारे।

माता सती और प्रजापति दक्ष की कथापौराणिक कथा के अनुसार, एक बार प्रजापति दक्ष ने कनखल में महायज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ के लिए उन्होंने देवी-देवताओं, ऋषियों, मुनियों और राजाओं को आमंत्रित किया, लेकिन उन्होंने अपनी पुत्री सती और महादेव को नहीं बुलाया।

देवी-देवताओं, ऋषियों, मुनियों को यज्ञ में जाते हुए देख माता सती ने यज्ञ में शामिल होने के लिए इच्छा जाहिर की। माता सती को महादेव ने समझाया कि यज्ञ में बिना निमंत्रण मिलने पर जाना सही नहीं है।

भले ही वह पिता का घर क्यों न हो। माता सती ने कहा कि पिता के घर जाने के लिए किसी निमंत्रण की जरूरत नहीं है। माता सती ने महादेव की बात को नहीं माना। इसके बाद भगवान शिव ने माता को सती को नंदी और अपने अन्य गणों के साथ यज्ञ में जाने की अनुमति दी।

प्रजापति दक्ष ने भगवान शिव के लिए कहे अपशब्दयज्ञ में माता सती पहुंची, तो माता प्रसूति ने उनका स्वागत नहीं किया। जब माता सती अपने पिता के पास पहुंची, तो प्रजापति दक्ष ने भरे समाज में भगवान शिव के लिए अपशब्द बोलने लगे। माता सती को भगवान शिव का घोर अपमान सहन नहीं हुआ। उनको शिव जी की बात न मानने का पश्चाताप हुआ। अपने आराध्य के अपमान के कारण और पिता के अहंकार का विरोध जताते हुए माता सती ने यज्ञ अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए।

कई पुराणों में मिलता है वर्णन
माता सती के आत्मदाह करने का वर्णन कई पुराणों में मिलता है। स्कंद पुराण के काशी खंड में माता सती के आत्मदाह करने का वर्णन मिलता है। इसके अलावा श्रीमद्भागवत महापुराण के चतुर्थ स्कंध और शिव पुराण के रुद्र संहिता के सती खंड में भी माता सती की कथा देखने को मिलती है।

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