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ट्रंप ने ओमान की खाड़ी में 3 भारतीय नाविकों की मौत पर दिया बयान, PM मोदी ने उठाया था सुरक्षा का मुद्दा

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इवियन (फ्रांस): फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में कई अहम मुद्दों पर बात हुई। दोनों नेताओं की बैठक के दौरान ओमान की खाड़ी में हाल ही में हुई उस घटना का मुद्दा प्रमुखता से उठा, जिसमें 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। PM मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति से समुद्री व्यापार से जुड़े कर्मचारियों के लिए बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

ट्रंप ने PM मोदी के बयान पर दी प्रतिक्रिया

पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने घटना पर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ‘मैंने इसके बारे में सुना है। यह एक कठिन पेशा है और हम इस पर मिलकर काम करते हैं। ऐसा हमेशा से होता रहा है, लेकिन हम साथ मिलकर काम करते हैं। हम उन सभी लोगों से प्यार करते हैं। वे महान लोग हैं।’ बैठक में पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेलो की घटना पर खास चर्चा हुई। इस जहाज पर भारतीय चालक दल के 24 सदस्य सवार थे। जहाज पर अमेरिकी सेना के हमले में 3 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी।

‘भारतीय नाविकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता’

ओमान की खाड़ी में हुई दुखद घटना के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा कि दुनिया भर में लाखों भारतीय नाविक समुद्री क्षेत्र में काम कर रहे हैं और उनकी सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों के बीच नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा,

‘अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के लिए समुद्री मार्गों का सुरक्षित और खुला रहना बेहद जरूरी है।’

जी7 में भी PM ने उठाया था नाविकों का मुद्दा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी शांति समझ के तहत नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने इससे एक दिन पहले जी7 नेताओं को संबोधित करते हुए भी समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। ‘नई साझेदारियां और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण’ विषय पर आयोजित सत्र में उन्होंने कहा कि मौजूदा समुद्री अस्थिरता की मानवीय कीमत भारत के लिए लगातार बढ़ती जा रही है।

‘कई भारतीय नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और सैन्य नाकेबंदी के बीच नागरिक समुद्री कर्मचारियों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने सभी देशों से सहयोग की अपील करते हुए कहा,

‘कई भारतीय नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। समुद्री व्यापार के माध्यम से देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।’

भारत ने पहले भी जताई थी कड़ी आपत्ति

तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत सरकार ने इस मामले पर अमेरिका के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया था। भारत ने नागरिक जहाजों पर घातक कार्रवाई को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की थी और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। ओमान की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच यह मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है। बता दें कि भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री वर्कफोर्स को उपलब्ध कराता है और यही वजह है कि देश के लिए ये मुद्दा अहम है।

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