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प्लांट के बाहर साढ़े 3 घन्टे तक शव रख किया विरोध प्रदर्शन, हुआ समझौता

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  • शिवालिक प्लांट में कार्यरत मजदूर की मौत मामला
  • प्लांट प्रबंधन ने मृतक की पत्नी को प्रतिमाह खर्च व बच्चों की पढ़ाई की ली जिम्मेदारी

महासमुंद: शिवालिक प्लांट में कार्यरत मजदूर के शव रखकर करीब साढ़े 3 घन्टे तक किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद प्लांट प्रबंधन और परिजनों के बीच समझौते के बाद मामला शांत हुआ। प्लांट प्रबंधन ने मृतक के परिजनों को तहसीलदार, पुलिस गांव प्रमुख के समक्ष आजीवन घर खर्च और उनके बच्चों की पूरी पढ़ाई का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है। प्रबंधन के इस फैसले के बाद बुधवार को दोपहर 12 बजे से प्लांट के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर आंदोलनरत मृतक के परिजन और ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किया। जानकारी के अनुसार ग्राम नांदगांव निवासी रमेश जांगड़े मूढ़ेना स्थित शिवालिक स्टील प्लांट में नियमित कर्मचारियों के रूप में कार्यरत था। विगत 22 मार्च 2026 को रात्रि ड्यूटी के दौरान करीब 12 बजे जूनियर कर्मी की लापरवाही पूर्वक कार्य करने से उनके आंखों में गंभीर चोट आ गई। प्रबंधन द्वारा घटना की सुचना दिए बिना ही रायपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करा दिया और शिवालिक स्टील प्लांट द्वारा इस घटना के संबंध में पुलिस में किसी भी प्रकार की प्राथमिक की दर्ज नहीं कराई गई। घटना के 2-3 दिनों के बाद परिजनों को इसकी जानकारी दी गई। प्रबंधन ने परिजनों को बताया कि रमेश की आंखों में चोट है इस वजह से उनका इलाज करा रहे हैं।बताया जाता है कि रमेश का पूर्ण रूप से इलाज नहीं हो पाया था और उसे घायल अवस्था मे ही घर पर लाकर छोड़ दिया गया।

2 से 3 दिनों बाद रमेश ने जब आंख में तेज दर्द होने की बात बताई तो परिजनों ने इसकी जानकारी प्लांट प्रबंधन को दी। प्लांट प्रबंधन ने उसे उपचार के लिए रायपुर के एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जिसकी मृत्यु दिनांक 22 जून 2026 को हो गई। मामले में शिवालिक प्लांट प्रबंधन ने परिजनों को किसी भी प्रकार की मुआवजा देने से मना कर दिया। नाराज परिजनो ने बुधवार को रायपुर में मृतक के शव के पीएम के पश्चात शव को शिवालिक स्टील प्लांट के समक्ष मुख्य प्रवेशद्वार पर रखकर धरना पर बैठ गए।

प्रशासन की समझाईश के बाद भी नहीं माने परिजन
मामले की जानकारी जैसे ही पुलिस और जिला प्रशासन को मिली अफसर मौके पर पहुंच गए। प्रशासन की ओर से तहसीलदारएसडीओपी के समझाने के बाद भी नहीं माने और शव को नहीं हटाने पर अड़े रहे। करीब साढ़े 3 बजे प्लांट प्रबंधन की ओर से मामले में समझौते की जब प्रस्ताव रखा गया तो फिर परिजनो और ग्रामीणों का आक्रोश शांत हुआ।

जानिए क्या है हुआ समझौता
तहसीलदार जुगल किशोर पटेल ने बताया कि प्लांट प्रबंधन की ओर से मृतक की पत्नी को रमेश को प्लांट प्रबंधन की ओर से दिया जा रहे वेतन का भुगतान घर खर्च के रूप में दिया जाएगा और उनके बच्चों की पूरी शिक्षा का भार भी प्लांट प्रबंधन उठाएगा। मृतक के परिजन और प्लांट प्रबंधन के बीच हुए समझौते के दौरान तहसीलदार, एडीएओपी कोतवाली थाना प्रभारी और मृतक की पत्नी, बेटे भाई और गांव के बुजुर्ग मौजूद रहें। परिजनो ने लिखित समझौते की बात कही है जिस पर प्रबंधन ने सहमति जताई है।

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