हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष का व्रत रखा जाता है. ये व्रत भगवान शिव को समर्पित किया गया है. प्रदोष का व्रत जिस दिन पड़ता है, उस दिन के वार के नाम पर इसको जाना जाता है. इस व्रत की महिमा का वर्णन शिव पुराण समेत अनेक पुराणों में किया गया है. इस व्रत में प्रदोष काल का महत्व बहुत अधिक होता है. प्रदोष काल में ही शिव-पार्वती का पूजन किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष का व्रत रखने और पूजन करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. भगवान की कृपा से जीवन के सारे कष्ट कट जाते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. यही नहीं मृत्यु के बाद आत्मा को शिव धाम में स्थान मिलता है. 27 जून यानी कल शनिवार के दिन शनि प्रदोष व्रत है. खास बात ये है कि कल साल 2026 का आखिरी शनि प्रदोष व्रत है. आइए जानते हैं शनि प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि.
शनि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त:- शनि प्रदोष व्रत पर कल शिव जी के पूजन का शुभ मुहूर्त शाम को 07 बजकर 23 मिनट शुरू होगा. शिव जी की पूजा का ये शुभ मुहूर्त रात में 09 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. कल शिव पूजन के लिए भक्तों को 02 घंटे 01 मिनट का समय प्राप्त होगा.
शनि प्रदोष व्रत पूजा विधि:- शनि प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें. फिर शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी महाराज की पूजा करें. शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें. इसके बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप और शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ करें. इस दिन शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करें और जरूरतमंद लोगों को दान दें.
शनि प्रदोष व्रत तिथि
1. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 जून यानी आज रात 10 बजकर 22 मिनट पर हो रही है.
2. वहीं इस तिथि का समापन 28 जून को रात 12 बजकर 43 मिनट होगा.



