जैविक खाद निर्माण, पीजीएस प्रमाणीकरण, शैक्षणिक भ्रमण और उपलब्ध कराई जा रही आर्थिक सहायता

जिले के सभी ग्राम पंचायतों में चलाया गया खेत बचाओ अभियान, 2 हजार से अधिक किसानों ने जैविक खेती अपनाने दी सहमति
रायगढ़, 2 जुलाई 2026 : जिले में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, खाद निर्माण की जानकारी, पीजीएस प्रमाणीकरण, शैक्षणिक भ्रमण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी गांव-गांव पहुंचकर किसानों को ऐसी खेती की तकनीक सिखा रहे हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़े और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर हो। इस बदलाव को जनभागीदारी का स्वरूप देने के लिए कृषि विभाग द्वारा एक महीने तक जिले की सभी 549 ग्राम पंचायतों में ’’खेत बचाओ अभियान’’ चलाया गया। इसके तहत 930 किसानों ने 337 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती तथा 1126 किसानों ने 429 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती अपनाने की सहमति दी। जैविक एवं प्राकृतिक खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है, रासायनिक उर्वरकों पर खर्च घटता है, जल संरक्षण होता है और उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न मिलता है।
कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि कृषक उन्नति योजना अंतर्गत जो किसान धान के स्थान पर दलहन, तिलहन या अन्य खरीफ फसलें अपनाएंगे, उन्हें प्रति एकड़ 15 हजार रुपए की आदान सहायता मिलेगी। पहले से मक्का, रागी, कोदो, कुटकी, तिलहन, दलहन और कपास जैसी फसलें लेने वाले किसानों को भी 10 हजार रुपए प्रति एकड़ की सहायता मिलती रहेगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में जिले में 1000 हेक्टेयर क्षेत्र में परंपरागत खेती, 500 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती तथा 450 एकड़ में जैविक खेती की गई। वहीं 1680 हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित धान और पौष्टिक मोटे अनाजों का उत्पादन किसानों की आय का नया आधार बन रहा है। देवभोग और जवाफूल जैसी पारंपरिक धान की किस्में अब केवल पहचान नहीं, बल्कि किसानों के लिए बेहतर आमदनी का माध्यम भी बन रही हैं। रागी, कोदो और अन्य मोटे अनाजों की बढ़ती मांग ने किसानों को यह भरोसा दिया है कि फसल विविधीकरण केवल जोखिम कम नहीं करता, बल्कि आय बढ़ाने का भी मजबूत माध्यम बन सकता है।



