सावन हिंदी पंचांग का पांचवां महीना होता है. ये माह शिव भक्ति को समर्पित किया गया है. सावन के माह में भगवान शिव का विशेष पूजन किया जाता है. इस माह में शिव जी के जलाभिषेक का विशेष महत्व है. यही कारण है कि सावन में शिव भक्त कांवड़ में पावन नदियों से जल लाकर भगवान का जलाभिषेक करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस माह में विधि-विधान से पूजा और जलाभिषेक करने पर महादेव सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. इस साल सावन जुलाई महीने में 30 तारीख से शुरू हो रहा है, जोकि 28 अगस्त को सावन माह की पूर्णिमा तक रहेगा. सावन के समय में शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. हर कोई जलाभिषेक करके शिव जी से अपनी मनोकामना कहता है. सावन महादेव को बहुत प्रिय माना जाता है, लेकिन ऐसा क्यों है और इसके पीछे का क्या रहस्य छिपा है? आइए विस्तार से जानते हैं.
सावन में किया था विषपान:- पौराणिक कथा के अनुसार, सागर मंथन से निकला भयंकर कालकूट विष से संसार की रक्षा महादेव ने सावन माह में ही की थी. यही वो पावन महीना था, तब सृष्टि की रक्षा की खातीर महादेव ने विषपान किया था और उसे अपने कंठ में धारण करके नीलकंठ कहलाए थे, लेकिन विषपान के बाद महादेव के शरीर में गर्मी बढ़ने लगी थी, तब उस गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने उनको जल चढ़ाया था. तभी से सावन में शिव के जलाभिषेक की पंरपरा शुरू हो गई. तभी से शिव जी को सावन और जल अतिप्रिय लगता है.
महादेव और माता पार्वती के मिलन का है महीना:- राजा दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह करने के बाद माता सती ने अपना दूसरा जन्म पर्वतराज हिमालय की बेटी बनकर मां पार्वती के रूप में लिया था. माता पार्वती ने शिवजी को प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था. शास्त्रों के अनुसार, सावन माह में ही भगवान ने माता की पुकार सुनी थी और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने सावन के सोमवार के दिन मां से विवाह किया था. ये माह महादेव और माता पार्वती के मिलन का भी है, इसलिए भी महादेव को ये महीना बहुत प्रिय है.
सावन में ससुराल आए थे महादेव:- माना जता है कि भगवान शिव सावन के महीने में धरती पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां उनका स्वागत भव्य स्वागत किया गया था. साथ ही जलाभिषेक भी किया गया था. कहा जाता है कि कि प्रत्येक वर्ष सावन माह में भगवान शिव अपनी ससुराल आते हैं, इसलिए उनको सावन का महीना बहुत प्रिय है.



