अनीता गर्ग अमन पथ जिला ब्यूरो रायगढ़ : छत्तीसगढ़ में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जल जीवन मिशन (नल जल योजना) के तहत करोड़ों-अरबों रुपये खर्च किए गए। गांव-गांव में ऊंची पानी की टंकियां बनाई गईं, पाइपलाइन बिछाई गई और घर-घर नल लगाए गए। सरकारी स्तर पर समय-समय पर यह दावा भी किया जाता रहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट दूर हो गया है।
लेकिन रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ जनपद क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों की तस्वीरें इस दावे की दूसरी हकीकत बयां करती नजर आ रही हैं।
स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार धर्मजयगढ़ जनपद की कई ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गईं ऊंची पानी की टंकियां आज भी शोपीस बनकर खड़ी हैं। घर-घर नल तो लगाए गए हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं पहुंच रहा। गर्मी के दिनों में ग्रामीणों को आज भी हैंडपंप, कुओं और दूरस्थ जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टंकियां बन गईं, पाइपलाइन बिछ गई और घर-घर नल लग गए, तब आखिर पानी कहां गायब हो गया?

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर टंकियों को भरने के लिए पर्याप्त जलस्रोत ही उपलब्ध नहीं कराया गया। कहीं बोरवेल का खनन अधूरा है, कहीं पर्याप्त पानी नहीं मिला, तो कहीं मोटर या विद्युत व्यवस्था पूरी नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई योजनाएं आज भी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रही हैं।
इस समाचार के साथ प्रकाशित तस्वीरें भी धर्मजयगढ़ जनपद की कुछ ग्राम पंचायतों की हैं। इन तस्वीरों में कई स्थानों पर पानी की टंकियां सूनी खड़ी दिखाई देती हैं। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार बच्चे इन्हीं टंकियों पर चढ़कर खेलते नजर आते हैं। कुछ टंकियां अब पानी की जगह विभिन्न प्रकार के विज्ञापनों का माध्यम बनती दिखाई देती हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इन टंकियों का उद्देश्य केवल निर्माण करना था या वास्तव में ग्रामीणों तक पानी पहुंचाना?

कुछ समय पहले यह जानकारी भी सामने आई थी कि नल जल योजना के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। लेकिन जब टंकी में पानी ही नहीं पहुंचेगा, तो पंचायत आखिर किस व्यवस्था का संचालन करेगी? मूल समस्या का समाधान किए बिना जिम्मेदारी स्थानांतरित करना क्या उचित होगा?
इधर नल जल योजना से जुड़े ठेकेदारों द्वारा अपने बकाया भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। ऐसे में यह प्रश्न भी उठता है कि जिन योजनाओं का लाभ अभी तक ग्रामीणों तक पूरी तरह नहीं पहुंचा, उनकी गुणवत्ता, निगरानी और भुगतान प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कब होगी?
जरूरत इस बात की है कि रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में नल जल योजना का भौतिक सत्यापन कराया जाए। जहां टंकियां बनी हैं लेकिन पानी नहीं पहुंच रहा, वहां कारणों की जांच हो। जहां निर्माण कार्य अधूरा है, उसे शीघ्र पूरा कराया जाए और यदि कहीं भी लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए।
ग्रामीणों को ऊंची टंकियां नहीं, घर के नल में बहता पानी चाहिए। विकास की असली पहचान निर्माण कार्य नहीं, बल्कि उस योजना का आम जनता तक पहुंचने वाला वास्तविक लाभ है।



