हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन नाग पंचमी का पावन पर्व मनाया जाता है. ये पर्व नाग देवता को समर्पित किया गया है. इस दिन विधि-विधान से नाग देवता की पूजा की जाती है. नाग पंचमी के दिन पूजन करके नाग देवता से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल नाग पंचमी का पावन पर्व 17 अगस्त को मनाया जाएगा. इस दिन सावन का तीसरा सोमवार है और सूर्य संक्रांंति भी है.नाग पंचमी के दिन देश के कई स्थानों पर नागों को दूध चढ़ाया जाता है. नागों को दूध चढ़ाने की ये परंपरा काफी प्रचिलित है. हालांकि, अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि नाग पंचमी के दिन नागों को दूध क्यों चढ़ाया जाता है? क्या इस पंरपरा का कोई धार्मिक कारण है? नागों को दूध चढ़ाने को लेकर धर्म शास्त्रों में क्या कहा गया है?
नाग पंचमी पर नाग देवता को चढ़ाया जाता है दूध:- धार्मिक मान्यता है कि नाग भगवान शिव को बहुत प्रिय हैं. उन्होंने स्वयं गले में वासुकी नाग को धारण करके रखा है. भगवान शिव के गले में विराजमान वासुकी नाग शक्ति, संरक्षण और प्रकृति का प्रतीक माने जाते हैं. यही कारण है कि नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु दूध, जल, हल्दी, कुश और पुष्प नाग देवता और चढ़ाते हैं और उनकी विधिपूर्वक पूजा करते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार पर नाग देवता का आशीर्वाद बना रहता है, जिससे खुशहाली आती है.
शास्त्रों में नहीं मिलता इसका उल्लेख:- धर्म शास्त्रों में नाग देवता की पूजा का महत्व तो विस्तार से बताया गया है, लेकिन जीवित सांप को दूध पिलाने के बारे में साफ तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. कई विद्वानों का मानना है कि मुख्य रूप से नाग देवता की प्रतिमा, चित्र या शिवलिंग पर स्थापित करके नाग स्वरूप को दूध चढ़ाने की पंरपरा है. वहीं वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, सांप प्राकृतिक रूप से दूध नहीं पीते. वे मांसाहारी जीव हैं. सांप कई बार कई बार प्यास या तनाव की स्थिति में दूध जैसा तरल पदार्थ पी सकते हैं, लेकिन ये उनका प्राकृतिक आहार नहीं माना जाता है, इसलिए नाग पंचमी के अवसर पर जीवित सांप को दूध पिलाने से बचना चाहिए.



