19 वर्षीय छात्र की दाहिनी आंख की निचली पलक से निकाली गई गांठ, हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए भेजा गया ऊतक
मनेन्द्रगढ़ : 220 बिस्तर सिविल चिकित्सालय, मनेन्द्रगढ़ के नेत्र रोग विभाग में एक 19 वर्षीय युवक की दाहिनी आंख की निचली पलक में पिछले करीब चार वर्षों से मौजूद गांठ का सफलतापूर्वक शल्य-उच्छेदन किया गया। स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत 30 जुलाई 2026 को की गई इस शल्यक्रिया के दौरान किसी प्रकार की जटिलता सामने नहीं आई और मरीज ने पूरी प्रक्रिया को अच्छी तरह सहन किया।जानकारी के अनुसार ग्राम देवाडांड निवासी 19 वर्षीय राज कुमार वर्तमान में आदिवासी पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में रहकर महाविद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं। उनकी दाहिनी आंख की निचली पलक में लगभग चार वर्षों से एक गांठ बनी हुई थी। समय के साथ गांठ धीरे-धीरे आकार में बढ़ती जा रही थी, जिसके कारण छात्र लंबे समय से परेशान था। मरीज ने पूर्व में नजदीकी अस्पताल में उपचार भी कराया था, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के कारण गांठ बनी रही।
करीब एक सप्ताह पूर्व राज कुमार उपचार के लिए 220 बिस्तर सिविल चिकित्सालय, मनेन्द्रगढ़ के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी पहुंचे। नेत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा विस्तृत परीक्षण किए जाने पर दाहिनी आंख की निचली पलक में गांठ पाई गई। चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद गांठ को शल्यक्रिया के माध्यम से निकालने तथा निकाले गए ऊतक की हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच कराने का निर्णय लिया गया।शल्यक्रिया से पूर्व मरीज की आवश्यक रक्त जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट सामान्य पाई गई। इसके साथ ही मरीज की दृष्टि क्षमता और पलक की गतिविधियां भी सामान्य थीं। सभी आवश्यक जांच एवं चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद 30 जुलाई को स्थानीय एनेस्थीसिया के अंतर्गत Right Lower Eyelid Mass Excision की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई।
जांच के बाद स्पष्ट होगा गांठ का अंतिम निदान
शल्यक्रिया के दौरान निकाले गए ऊतक के नमूने को 10 प्रतिशत फॉर्मालिन में सुरक्षित कर हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षण (HPE) के लिए पैथोलॉजी विभाग भेजा गया है। चिकित्सकों के अनुसार गांठ की वास्तविक प्रकृति एवं अंतिम निदान की पुष्टि हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट आने के बाद ही की जा सकेगी।
चिकित्सकीय टीम ने निभाई अहम भूमिका
इस सफल शल्यक्रिया में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित मिर्रे ने ऑपरेटिंग सर्जन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके साथ स्टाफ नर्स रीता मिश्रा एवं नेत्र सहायक रीमा सिंह ने सहयोग प्रदान किया।अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यह शल्यक्रिया मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन तथा 220 बिस्तर सिविल चिकित्सालय, मनेन्द्रगढ़ के अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी के संरक्षण, सहयोग एवं सौजन्य से सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
इस मामले में खास बात यह रही कि लंबे समय से पलक की गांठ से परेशान 19 वर्षीय छात्र को स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सा एवं शल्यक्रिया की सुविधा उपलब्ध हुई। इससे मरीज को उपचार के लिए दूरस्थ चिकित्सा केंद्रों का रुख करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। अब हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच की रिपोर्ट के आधार पर गांठ की प्रकृति और आगे की चिकित्सा संबंधी निर्णय लिया जाएगा।



