उज्जैन. सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष फलदायी माना जाता है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा और व्रत करने पर भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे सुख-समृद्धि, मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सफलता के योग बनते हैं. हर माह दो प्रदोष व्रत आते हैं लेकिन सावन का प्रदोष व्रत अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है
सोम प्रदोष का क्या अर्थ है:- सावन माह में पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है. जब त्रयोदशी तिथि सोमवार को आती है, तब उसे सोम प्रदोष कहा जाता है. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को विधि-विधान से करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है. जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या अशुभ प्रभाव दे रहा हो, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है. संतान सुख, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की कामना से भी श्रद्धालु यह व्रत रखते हैं
जरूर करें इन नियमों का पालन:- प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें. पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें. इसके बाद शिव परिवार का पूजन करें और भगवान शिव पर बेलपत्र, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें. फिर प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें. पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें. शाम को पूजन के बाद ही अपना उपवास खोलें.



