12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों की हुई समीक्षा
अधिकाधिक मामलों को मध्यस्थता एवं लोक अदालत में निराकृत करने के दिए निर्देश
कोरिया : सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में संचालित ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए’ 3.0 अभियान तथा आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत 12 सितंबर 2026 को सफल बनाने के उद्देश्य से गत गुरुवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, बैकुण्ठपुर के सभागार में समीक्षा एवं रणनीति बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बैकुण्ठपुर योगेश पारीक ने की। उन्होंने न्यायालयों में लंबित ऐसे सभी उपयुक्त प्रकरणों का सूक्ष्म परीक्षण कर उन्हें अधिक से अधिक संख्या में मध्यस्थता के लिए संदर्भित करने के निर्देश दिए। साथ ही राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए समझौता योग्य प्रकरणों की पहचान कर संबंधित पक्षकारों को प्री-सिटिंग हेतु नोटिस जारी करने तथा उन्हें लोक अदालत के लाभों से अवगत कराने पर विशेष जोर दिया, ताकि अधिकाधिक मामलों का आपसी सहमति से निराकरण हो सके।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने उक्ताशय की जानकारी दी।
बैठक में न्यायाधीशों ने न्यायिक कार्य के दौरान मध्यस्थता एवं लोक अदालत से संबंधित विभिन्न व्यवहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। इसमें पक्षकारों की सहभागिता, अधिवक्ताओं के सहयोग, उपयुक्त प्रकरणों का चयन, समयबद्ध रेफरल प्रक्रिया, समझौते की संभावनाओं का आकलन तथा प्रभावी समन्वय जैसे विषय शामिल रहे। अभियान के दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए गए, जिससे अधिकाधिक प्रकरणों का सफल एवं शीघ्र निराकरण किया जा सके।
बैठक में मध्यस्थता केंद्र बैकुण्ठपुर के नोडल अधिकारी एवं न्यायाधीश समीर कुजूर सहित जिला मुख्यालय में पदस्थ सभी न्यायाधीश उपस्थित रहे। वहीं सिविल न्यायालय मनेन्द्रगढ़, चिरमिरी एवं जनकपुर के न्यायाधीश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।



