अमन पथ न्यूज बालोद से उत्तम साहू : जिले के ग्राम निपानी में संचालित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा में करोड़ों की आर्थिक गड़बड़ी को चार साल बीत गए गए हैं। 2022 में जनवरी में ही मामले का खुलासा हुआ था जहां पर किसानों की मेहनत की जमा राशि का गबन हुआ था। लगभग 500 किसानों के खाते से 5 करोड़ 43 लाख रुपए गबन करने की पुष्टि हुई थी। अब क्या फिर से वही कांड बालोद जिले में दोहराने की तैयारी हैं। जानकारी के अनुसार जिले के अनेक सेवा सहकारी समितियों में सिलक राशि में गड़बड़ी की जानकारी प्राप्त हुई है। खासकर डौंडी ब्रांच के कई समितियों के सिलक राशि मे शार्टेज हैं लेकिन शाखा प्रबंधक और नोडल अधिकारी के द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से समिति प्रभारियों के हौसले बुलंद है।
क्या होती हैं ‘सिलक राशि’
सहकारी समितियों की भाषा में ‘सिलक राशि’ का अर्थ ‘नकद शेष’ होता है। यह वह नकद पैसा है जो किसी निश्चित समय या दिन की समाप्ति पर बैंक की तिजोरी काउंटर या सहकारी समिति के पास भौतिक रूप से मौजूद रहती है।सरल शब्दों में, दिनभर के लेनदेन (पैसे जमा करने और निकालने) के बाद बैंक या समिति के पास जो बचा हुआ कैश होता है, उसे ही बही-खातों में ‘सिलक राशि’ कहा जाता है। इसका उपयोग अन्य लेनदेन में नहीं किया जा सकता हैं।जिसका उपयोग ग्राहकों को तुरंत भुगतान करने के लिए किया जाता है।
समिति प्रभारी सिलक राशि का कर रहे हैं उपयोग
बता दे इस राशि का उपयोग समिति के अन्य किसी भी तरह के लेनदेन में नहीं किया जा सकता हैं लेकिन इस राशि का समिति के प्रभारी अन्य खर्च जैसे बारदानों की अल्टी पलटी ,मजदूरी भुगतान सहित अन्य खर्चे के लिए इस राशि का उपयोग कर रहे है। एक और समिति प्रभारियों का कहना है उन्हें चार-पांच माह से वेतन नहीं मिल रहा है वहीं दूसरी ओर लाखों रुपए सीलक की राशि दबाए बैठे हैं जो तत्काल ब्रांच में जमा होनी चाहिए लेकिन सब कुछ जानते हुए जिम्मेदार अधिकारी भी सत्यापन करना जरूरी नहीं समझ रहे हैं। उक्त राशि किसानों के ऋण राशि बचत बैंक में जमा राशि जैसी राशियां हैं।
इस प्रकार से समिति प्रभारियों द्वारा सिलक राशि का उपयोग कर शॉर्टेज कर अनियमितता की जा रही है जो गबन की श्रेणी में आता हैं अगर समय रहते इस पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती तो फिर से सहकारिता क्षेत्र में निपानी जैसे कांड होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।




