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ममता, आस्था और परंपरा का भव्य संगम… गरियाबंद में धूमधाम से मनाया गया कमरछठ,सैकड़ों महिलाओं ने एक साथ की पूजा, बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की मांगी कामना,पुराना मंगल बाजार चौक पर उमड़ा मातृशक्ति का जनसैलाब

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राधेश्याम सोनवानी,गरियाबंद :- शहर में बुधवार को आस्था, श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ कमरछठ यानी हलषष्ठी पर्व मनाया गया। गरियाबंद के वार्ड क्रमांक 14 और 15 की महिलाओं ने पुराना मंगल बाजार चौक पर सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। इस दौरान सैकड़ों महिलाएं व्रत और पूजा में शामिल हुईं।

सुबह से ही पुराना मंगल बाजार चौक पर महिलाओं की भीड़ जुटने लगी थी। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंची महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और कमरछठ पर्व की सदियों पुरानी परंपराओं का निर्वहन किया। महिलाओं ने सगरी बनाकर उसमें पारंपरिक पूजन सामग्री अर्पित की तथा षष्ठी माता की पूजा कर अपने बच्चों के स्वस्थ, सुखी और दीर्घ जीवन की कामना की।

कमरछठ या हलषष्ठी पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा और मातृत्व की आस्था से जुड़ा प्रमुख पर्व है। भादो मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर माताएं अपनी संतान की दीर्घायु के लिए निर्जला अथवा परंपरा अनुसार व्रत रखती हैं। पूजा के दौरान सगरी बनाने, भैंस के दूध, दही और घी से पूजन करने के साथ ही लाई, महुआ, तिल, अरहर सहित पारंपरिक सामग्री का भोग अर्पित किया गया।

पर्व की एक विशेष परंपरा यह भी रही कि इस दिन हल से जोते गए खेतों में उपजे अनाज का उपयोग नहीं किया जाता। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने परंपरा के अनुसार पसहर चावल और विभिन्न प्रकार की भाजियों से तैयार प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया।

पुराणों और लोकमान्यताओं के अनुसार हलषष्ठी पर्व का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम से भी माना जाता है। भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र हल था, इसलिए इस तिथि को हलषष्ठी के नाम से जाना जाता है। छत्तीसगढ़ में यही पर्व कमरछठ या खमरछठ के रूप में विशेष श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।

भारती सिन्हा ने कहा, “कमरछठ केवल व्रत या पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह मां और संतान के अटूट रिश्ते, ममता और विश्वास का प्रतीक है। आज वार्ड 14 और 15 की सैकड़ों महिलाएं एक साथ यहां जुटीं और पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। हमने अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के साथ पूरे परिवार की सुख-शांति की कामना की है। ऐसी सामूहिक पूजा हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता को भी मजबूत करती है।”

अंजलि सिन्हा ने कहा, “आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी परंपराएं ही हमें अपनी जड़ों से जोड़कर रखती हैं। कमरछठ छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति की आस्था का बहुत बड़ा पर्व है। सैकड़ों महिलाओं का एक साथ जुटकर पूजा करना इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता के दौर में भी हमारी लोकसंस्कृति और परंपराएं पूरी मजबूती से जीवित हैं। हमारी कामना है कि हर बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और खुशहाल जीवन मिले और हर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहे।”

पुराना मंगल बाजार चौक पर आयोजित सामूहिक पूजा के दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक और पारंपरिक माहौल बना रहा। महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति से जुड़े इस महत्वपूर्ण पर्व को सामूहिक रूप से मनाया।

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