बिलासपुर/रायपुर: रायपुर जिले की आरंग तहसील के निस्दा गांव में अवैध खनन और महानदी में खनन का मलबा डंप करने के मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य शासन ने कार्रवाई की है। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि जांच में दोषी पाए गए सभी पट्टेदारों की माइनिंग लीज रद्द कर दी गई है।
राज्य शासन ने अदालत को यह भी बताया कि वर्तमान में संबंधित क्षेत्र में कोई भी माइनिंग लीज संचालित नहीं है।
लीज क्षेत्र से बाहर अवैध खनन का आरोप
निस्दा निवासी ओम प्रकाश सेन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ लोग स्वीकृत लीज क्षेत्र की सीमा से बाहर जाकर फर्शी पत्थर का अवैध खनन कर रहे हैं।
याचिका में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने और खनन से निकलने वाले मलबे को महानदी में डंप किए जाने का भी आरोप लगाया गया था। इससे नदी और आसपास के पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी।
जांच के बाद शुरू हुई कार्रवाई
शिकायतों पर अधिकारियों ने मामले की जांच की। इसके बाद पर्यावरण संरक्षण मंडल ने भी मामले में हस्तक्षेप करते हुए संबंधित खनन गतिविधियों को रोकने के निर्देश जारी किए।
मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद राज्य शासन की ओर से अदालत के समक्ष कार्रवाई की जानकारी प्रस्तुत की गई। सरकार ने बताया कि जांच में दोषी पाए गए सभी पट्टेदारों की माइनिंग लीज निरस्त कर दी गई है और फिलहाल संबंधित क्षेत्र में कोई माइनिंग लीज प्रभावी नहीं है।
हाईकोर्ट ने दिए कड़ी निगरानी के निर्देश
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पर्यावरण संरक्षण मंडल की ओर से उठाए गए कदमों को उचित माना और जनहित याचिका का निराकरण कर दिया।
हालांकि कोर्ट ने अधिकारियों को मामले में कड़ी निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि लीज क्षेत्र के बाहर अवैध खनन या महानदी में खनन का मलबा डंप किए जाने की कोई घटना सामने आती है, तो कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद निस्दा क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण मंडल की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




