मुंबई: टाटा ग्रुप से इस वक्त की बड़ी कारोबारी खबर सामने आई है। Tata Sons के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को एक बार फिर कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। बोर्ड बैठक में उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के प्रस्ताव को बहुमत से पारित किया गया। इसके साथ ही टाटा ग्रुप की शीर्ष होल्डिंग कंपनी की कमान फिलहाल चंद्रशेखरन के हाथों में ही बनी रहेगी।
चंद्रशेखरन वर्ष 2017 में Tata Sons के चेयरमैन बने थे। उनका मौजूदा पांच साल का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है। इससे पहले अगस्त में उन्होंने संकेत दिया था कि वह मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाना चाहते। इसके बाद कंपनी में उत्तराधिकारी की तलाश और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। अब बोर्ड के ताजा फैसले से तस्वीर बदल गई है।
RBI के फैसले के बाद बढ़ी Tata Sons की अहमियत
चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब Tata Sons के भविष्य को लेकर एक और बड़ा मुद्दा सामने है। भारतीय रिजर्व बैंक ने Tata Sons के NBFC पंजीकरण को वापस लेने के आवेदन को खारिज कर दिया है। इसके चलते कंपनी के सूचीबद्ध होने यानी शेयर बाजार में लिस्टिंग के मुद्दे पर फिर से चर्चा तेज हुई है।
Tata Sons टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और उसके पास समूह की कई बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी है। ऐसे में कंपनी की संभावित लिस्टिंग को भारतीय कॉरपोरेट बाजार की एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बोर्ड बैठक में लिस्टिंग के मुद्दे पर विचार हुआ, लेकिन इस पर अलग से कोई प्रस्ताव पारित हुआ या नहीं, इसे लेकर रिपोर्टों में अंतर है।
नोएल टाटा ने किया विरोध
बोर्ड के फैसले को लेकर एक और अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। हालांकि, बोर्ड के बहुमत ने प्रस्ताव का समर्थन किया और चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त करने का रास्ता साफ हो गया।
Tata Sons की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, चंद्रशेखरन ने बोर्ड के अनुरोध पर अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार किया और इसके बाद बोर्ड ने बहुमत से उनकी पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी।
इस फैसले के साथ अब चंद्रशेखरन का Tata Sons के नेतृत्व में तीसरा पांच वर्षीय कार्यकाल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, कंपनी की लिस्टिंग, नियामकीय स्थिति और Tata Trusts की भूमिका आने वाले समय में भी समूह के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने रहेंगे।




