Home छत्तीसगढ़ उत्तम सत्य दिवस पर गूंजा शांतिनाथ विधान का जयघोष

उत्तम सत्य दिवस पर गूंजा शांतिनाथ विधान का जयघोष

0

पर्यूषण राज महापर्व के पांचवें दिन श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विश्व शांति और जगत कल्याण की मंगलकामना

मनेन्द्रगढ़। पर्यूषण राज महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य दिवस के अवसर पर श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। विश्व शांति, जगत कल्याण तथा सर्वजन के स्वास्थ्य एवं समृद्धि की मंगलकामना को लेकर मंदिर परिसर में श्री 1008 बृहद शांतिनाथ विधान का भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। समाज के पदाधिकारियों, युवा वर्ग, महिला मंडल एवं बच्चों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

विधान के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना, स्तुति एवं धार्मिक विधान-पाठ किया। मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने समस्त जीवों के कल्याण, विश्व में शांति एवं सद्भाव तथा सभी के स्वस्थ, सुखी और समृद्ध जीवन की मंगल भावना की।

आत्मचिंतन और संयम का संदेश

जैन धर्म में भगवान शांतिनाथ की आराधना से जुड़ा शांतिनाथ विधान महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं ने शांति, संयम, आत्मचिंतन, वैराग्य एवं आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों को कम करने, क्षमा एवं मैत्री का भाव विकसित करने तथा अहिंसा और संयम के मार्ग पर चलने की भावना व्यक्त की। तप, साधना और शुभ भावों के माध्यम से आत्मशुद्धि एवं कर्मनिर्जरा की भावना को भी बल देने का संदेश दिया गया।

विश्व शांति और जगत कल्याण की मंगल भावना

श्रद्धालुओं ने शांतिनाथ भगवान के समक्ष श्रद्धा और भक्ति के साथ विश्व शांति तथा जगत कल्याण की मंगल भावना की। आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सत्य, अहिंसा, आत्मसंयम, सद्भाव और मानवता का संदेश दिया।

कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष विवेक कुमार जैन, कोषाध्यक्ष अमरचंद जैन, सचिव सुधीर जैन सहित राजेश जैन, सुभाष जैन, नरेंद्र जैन, यशराज, दीपू जैन, कपिल, निखिल तथा महिला मंडल से श्रीमती रश्मि, मधु जैन, पद्मिनी जैन, अंजली जैन, सरोज, रागिनी, ऋतु, आशा, मानवी एवं मेहर सहित समाज के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धर्म और आत्मशुद्धि का पर्व

पर्यूषण महापर्व के दौरान आयोजित यह विधान श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मसंयम और सद्भाव की प्रेरणा देने वाला अवसर भी बना। श्रद्धालुओं ने उत्तम सत्य के आदर्श को जीवन में अपनाने तथा सत्य, अहिंसा और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here