अनीता गर्ग अमन पथ ब्यूरो चीफ रायगढ़ :जिला रायगढ़ का आदिवासी बहुल क्षेत्र धरमजयगढ़ आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए तरस रहा है। लाखों की आबादी के भरोसे वाला सिविल अस्पताल धरमजयगढ़ अब इलाज के बजाय सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां छोटी सी चोट, एक्सीडेंट या बुखार के मरीज को भी डॉक्टर सीधे रायगढ़ रेफर कर देते हैं। 60-70 किलोमीटर दूर रायगढ़ जाने में गरीब आदिवासी मरीजों को न तो एम्बुलेंस मिलती है, न ही पैसे होते हैं। कई बार रास्ते में ही मरीज की हालत बिगड़ जाती है।
क्यों बना रेफर सेंटर?
ग्रामीणों के अनुसार –
1. अस्पताल में सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ जैसे स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही नहीं हैं।
2. एक्स-रे, सोनोग्राफी, ब्लड जांच की मशीनें या तो खराब हैं या स्टाफ नहीं है।
3. रात में ड्यूटी डॉक्टर अक्सर नहीं मिलते।
धरमजयगढ़ वनांचल क्षेत्र है, यहां अधिकतर गरीब और आदिवासी परिवार रहते हैं। उनके लिए रायगढ़ जाना मतलब 2000-3000 रुपये का खर्च। इसीलिए लोग कह रहे हैं कि शासन ने बिल्डिंग तो बना दी, लेकिन डॉक्टर और सुविधा देना भूल गया।
नागरिकों ने कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि सिविल अस्पताल में सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थाई पदस्थापना की जाए, जांच मशीनें चालू की जाएं और रेफर करने की इस प्रथा पर रोक लगाई जाए।





